
भोपाल। राधारमण आयुर्वेद महाविद्यालय में फार्माकोविजिलेंस (औषधि सतर्कता) जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर शासकीय अष्टांग आयुर्वेदिक महाविद्यालय एवं चिकित्सालय, इंदौर के फार्माकोविजिलेंस विभाग के जे.आर.एफ. डॉ. तेजस पोरवाल ने मुख्य वक्ता के रूप में व्याख्यान दिया. डॉ. पोरवाल ने कहा कि सभी पैथियों की औषधियों से ज्ञात या अज्ञात साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं. डॉक्टरों की यह नैतिक एवं पेशेवर जिम्मेदारी है कि वे सभी ज्ञात साइड इफेक्ट्स की रिपोर्ट शासन अथवा संबंधित संस्था को करें, जिससे रोगियों को सुरक्षित एवं प्रभावी चिकित्सा प्राप्त हो सके. उन्होंने बताया कि फार्माकोविजिलेंस की अवधारणा पश्चिमी देशों, विशेष रूप से अमेरिका और ब्रिटेन में बहुत पहले विकसित हो चुकी थी.औषधि सतर्कता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए इसे चिकित्सा क्षेत्र के लिए आवश्यक बताया.
राधारमण समूह के चेयरमैन आर. आर. सक्सेना ने इस मौके पर कहा कि फार्माकोविजिलेंस चिकित्सा व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण पहलू है, जो चिकित्सा क्षेत्र को अधिक सुरक्षित एवं प्रभावी बनाता है. ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से हमारे विद्यार्थी और शिक्षक न केवल जागरूक होते हैं बल्कि चिकित्सा क्षेत्र में अपनी जिम्मेदारी को और बेहतर तरीके से निभा सकते हैं. कार्यक्रम में महाविद्यालय के डॉ. पारसनाथ पारस, डॉ. हर्षर्दा हटले, डॉ. रश्मी खरे, डॉ. नीतू डोंगरे सहित शिक्षकगण और विद्यार्थी उपस्थित रहे.
