बिल्लम बावजी के दर्शन से ही कुंवारों को मिलता है योग्य जीवनसाथी

नीमच: जिले के जावद नगर में बिल्लम बावजी के दर्शन मात्र से ही कुंवारों को योग्य जीवनसाथी मिल जाता है और उनकी शादी तय हो जाती है। हर साल रंगपंचमी से रंगतेरस (19 मार्च से 27 मार्च) तक बिल्लम बावजी की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है, जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं।बिल्लम बावजी की मूर्ति जावद नगर के श्री रिद्धिसिद्धि गणपति मंदिर में विराजित है। परंपरा के अनुसार, रंगपंचमी के दिन इस मूर्ति को विशेष अनुष्ठान के साथ बाहर निकाला जाता है और नगर भ्रमण कराया जाता है। इसके बाद 9 दिनों तक भक्तजन उनकी विधिवत पूजा-अर्चना करते हैं और कुंवारे युवक-युवतियां शादी की मनोकामना लेकर उनके दर्शन के लिए आते हैं।
पूजा से मनोकामना होती है पूरी
नगर के वरिष्ठ श्रद्धालु प्रवीण सोनी और राजेंद्र बोहरा बताते हैं कि वर्षों से इस परंपरा का पालन किया जा रहा है। पहले यहां श्रद्धालुओं की संख्या कम हुआ करती थी, लेकिन अब हर साल हजारों की संख्या में कुंवारे युवक-युवतियां, उनके माता-पिता और परिजन बिल्लम बावजी के दर्शन के लिए आते हैं।

ऐसा कहा जाता है कि जिन्होंने भी सच्चे मन से यहां मन्नत मांगी है, उनकी शादी शीघ्र हो गई है।इधर, बिल्लम बावजी के आशीर्वाद से अब तक सैकड़ों कुंवारों के विवाह हो चुके हैं। यही कारण है कि उनकी ख्याति लगातार बढ़ रही है और हर साल देशभर से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं

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