दूसरी ट्रेन के सिग्नल पर चल पड़ी चित्रकूट एक्सप्रेस, डेड एंड पर जाकर बेपटरी हुआ इंजन
सतना : मैहर रेलवे स्टेशन पर उस वक्त बड़ा हादसा होते-होते बच गया जब जबलपुर-लखनऊ चित्रकूट एक्सप्रेस बिना सिग्नल के ही आगे बढ़ गई, जबकि ग्रीन सिग्नल मंडपम-बनारस एक्सप्रेस के लिए था. इस घटना से रेलवे विभाग में हड़कंप मच गया. रेलवे अधिकारियों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए चित्रकूट एक्सप्रेस को वापस बुलाया और उसे नए लोको पायलट के साथ रवाना किया. इस गंभीर लापरवाही के चलते पांच रेलवे कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया.
प्राप्त जानकारी के अनुसार पश्चिम मध्य रेलवे के जबलपुर रेल मंडल अंतर्गत मैहर स्टेशन गाड़ी संख्या 15205 लखनऊ-जबलपुर चित्रकूट एक्सप्रेस को देर रात 2.20 बजे के लगभग प्लेटफार्म नंबर 3 पर रोका गया. इस दौरान यहां से गाड़ी संख्या 22536 वाराणसी-मंडपम एक्सप्रेस को मेन लाइन से थ्रू निकालने के लिए ग्रीन सिग्नल दिया गया. किंतु चित्रकूट एक्सप्रेस के चालक ने इसे अपनी गाड़ी का सिग्नल समझकर गाड़ी आगे बढ़ा दी, जो डेड एंड में चली गई और इंजिन का एक पहिया पटरी से उतर गया.
इस घटना की जानकारी लगते ही जबलपुर मंडल मुख्यालय, पमरे मुख्यालय में हड़कम्प मच गया. तत्काल ही ट्रेन के लोको पायलट, असिस्टेंट लोको पायलट, ट्रेन मैनेजर व 2 लोको इंस्पेक्टर को सस्पेंड कर दिया गया है. मामले की जांच जारी है. इस घटनाक्रम के चलते ट्रेन लगभग 4 घंटा विलंब से जबलपुर पहुंची. बताया गया कि इंजन के पटरी से उतरते ही लोको पायलट ने तत्काल इंजिन को पीछे खींचा तो पहिया पटरी पर आ गया। किंतु वर्तमान में जिस प्रकार की अत्याधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम है, ट्रेन के सिग्नल तोड़ कर आगे जाने की घटना स्टेशन मैनेजर व जबलपुर स्थित कंट्रोल रूम को तत्काल लगी.
मचा हड़कम्प, 5 कर्मचारी सस्पेंड
इस घटना की जानकारी लगते ही तत्काल ही सबसे पहले एलपी बालाजी गुप्ता, एएलपी सूर्यकांत द्विवेदी व ट्रेन मैनेजर कृष्ण कुमार को सस्पेंड किया गया और इनके स्थान पर दूसरे स्टाफ को ट्रेन लेकर जबलपुर के लिए लगभग 4 घंटे बाद रवाना किया गया. वहीं लोको पायलट-एएलपी के लिए जो लोको इंस्पेक्टर नियुक्त थे, उनमें एलआई अशोक, कुमार, बीके मिश्रा को भी निलंबित किया गया है.
स्टेशन मैनेजर पर भी सवालिया निशान
सूत्रों के मुताबिक इस घटनाक्रम में मैहर के स्टेशन मैनेजर की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान लगे हैं. क्योंकि जिस समय चित्रकूट एक्सप्रेस के एलपी व ट्रेन मैनेजर वॉकी टॉकी पर अपनी ट्रेन का सिग्नल होने की बात कहकर ट्रेन आगे बढ़ाने की बात कह रहे थे, उस समय वॉकी टॉकी से स्टेसन मैनेजर भी जुड़ थे, उस समय तत्काल स्टेशन मैनेजर को उन दोनों को रोककर कहना था कि यह सिग्नल उनकी ट्रेन के लिए नहीं था, किंतु उन्होंने ऐसा नहीं किया.
एलआई ट्रेन में नहीं थे, फिर भी कार्रवाई
वहीं इस घटनाक्रम में दो एलआई को सस्पेंड किये जाने पर यह सवाल उठ रहे हैं कि जब दोनों एलआई घटना के समय ट्रेन में नहीं थे तो उन पर कार्रवाई क्यों, दोनों एलआई समय-समय पर एलपी व एलपी को सुरक्षा व संरक्षा के साथ ट्रेन संचालन की काउंसलिंग करते रहे हैं, बाद में जब वे इसका पालन नहीं करें तो एलआई पर सवाल क्यों.
अधिकारी छुपाते रहे घटनाक्रम
बताया जाता है कि इतनी बड़ी घटनाक्रम की जानकारी सीनियर डीईई टीआरओ लगातार अपने वरिष्ठ अफसरों से छुपाते रहे, खासकर पमरे मुख्यालय में सही जानकारी नहीं दी जाती रही. रेलवे बोर्ड को भी समय पर पूरी जानकारी नहीं दी गई. बाद में जब अलग-अलग सूत्रों से वरिष्ठ अफसरों को घटनाक्रम की जानकारी लगी तो सीनियर डीईई टीआरओ से नाराजगी व्यक्त किये जाने की भी खबर है
