सतना: नगर निगम द्वारा जल्द ही संपत्ति कर में 10 फीसदी की बढ़ोत्तरी की जाने वाली है. नगर सरकार के मंत्रिमण्डल में इस प्रस्ताव को हरी झण्डी दी जा चुकी है.
जनसपंर्क अधिकारी नगर निगम धीरज कुमार मिश्र से प्राप्त जानकारी के अनुसार मंगलवार को नगर निगम कार्यालय में नगर सरकार के मंत्रिमण्डल की बैठक आयोजित हुई. महापौर योगेश कुमार ताम्रकार की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में संपत्ति कर में 10 फीसदी की वृद्धि किए जाने से संबंधित प्रस्ताव सामने आया.
जिसमें वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए कर योग्य संपत्ति मूल्य निर्धारण हेतु संपत्तिकर नियम 2020 के प्रावधान का हवाला देते हुए इस बात का जिक्र किया गया कि कलेक्टर गाइडलाइन की दरों में हुई वृद्धि को देखते हुए नगर निगम सीमा क्षेत्र अंतर्गत कर योग्य संपत्ति के मूल्य की दरों में 10 प्रतिशत की वृद्धि की जाए. इस प्रस्ताव को नगर सरकार के मंत्रिमण्डल द्वारा सर्व सम्मति से स्वीकृति भी प्रदान कर दी गई. हलांकि इस प्रस्ताव का भविष्य परिषद के आगामी बजट सम्मिलन में पार्षदों के रुख के जरिए ही स्पष्ट हो सकेगा.
लेकिन यह जानकारी आते ही एक ओर जहां नगरवासियों के बीच खलबली मच गई वहीं दूसरी ओर पक्ष और विपक्ष के पार्षदों द्वारा भी आश्चर्य जताया जाने लगा. पार्षदों का कहना है कि क्लिष्ट तकनीकी शब्दावलियों का प्रयोग कर राज्य शासन के नियमों का हवाला देते हुए चोरी-छिपे पिछले दरवाजे से पहले ही संपत्तिकर में बढ़ोत्तरी की जा चुकी थी, ऐसे में एक बार फिर से 10 फीसदी की बढ़ोत्तरी आम जन की मुश्किलें कई गुना अधिक बढ़ जाएंगी.
नगरवासियों को अधारभूत सुविधाएं मुहैया करा पाने में असफल साबित हो रहे नगर निगम द्वारा संपत्ति कर में 10 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की कोशिश कोढ़ में खाज जैसी है. संपत्ति कर के लिहाज से देखा जाए तो सतना नगर निगम की दरें राज्य के महानगर भोपाल-इंदौर से मेल खाती नजर आती हैं. लेकिन आधारभूत सुविधाओं के मामले में जमीन-आसमान का अंतर है. दरअसल नगर निगम अपने बेतहाशा खर्चों को नियंत्रित करने के बजाए उसका सारा बोझ़ आम जन पर डालना चाहता है
