मालवा- निमाड़ की डायरी
संजय व्यास
वरिष्ठ भाजपा नेता पूर्व गृह मंत्री हिम्मत कोठारी रतलाम के जमीनी नेता हैं. रतलाम वासियों के हित में वे लड़ते रहे हैं, फिर यह नहीं देखते कि किस पार्टी के बैनर तले आंदोलन हो रहा है. जनहित में उन्होंने कई बार अपनी ही पार्टी की सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला है. इस मामले में वे समस्या को छोटी बड़ी के रूप में नहीं देखते, यदि जनता परेशान हो रही हेै तो नगर निगम के दफ्तर तक भी पहुंचे हैं. विगत 6 माह में शहर की खराब सड़कों के लिए वे निगम कार्यालय जाकर आयुक्त की खिंचाई कर चुके हैं. ठेला-रेहड़ी पर रोजगार करने वालों तक को विस्थापित करने के खिलाफ सड़क पर उतरने से उन्होंने परहेज नहीं किया. विगत माह कनेरी जलाशय योजना के जल को निवेश क्षेत्र को देने पर आपत्ति जताई.
उल्लेखनीय है कि हिम्मत कोठारी मंत्रित्व कार्यकाल में कनेरी जलाशय योजना आगामी 25 वर्षों हेतु रतलाम की पेयजल एवं सिंचाई की आवयश्कता देखते हुए ही स्वीकृत की गई थी. कोठारी इसके पहले भी सिटी फोरलेन की चौड़ाई बढ़ाने के विरोध में सरकार से लड़ चुके हैं. हाल में प्रॉपर्टी व्यवसायियों के आंदोलन में अपनी ही सरकार को कोसते नजर आए. वर्तमान खसरे-खाते को नकार नामांतरण में 1956-57 के रिकार्ड को अनिवार्य किए जाने के विरोध में कांग्रेस समर्थित आंदोलन में कोठारी भी शामिल हो गए थे. कांग्रेस नेता पारस सकलेचा के बगल में बैठकर उन्होंने सरकार को पहले अपने रिकॉर्ड की गलतिया सुधारने की नसीहत भी दे दी. अब पार्टी के कुछ नेता कोठारी की निष्ठा पर सवाल उठा रहे है, पर जनहिताय की उनकी फितरत ही ऐसी है. उन पर सवाल उठाना बेमानी है.
छूट नहीं रहा नेताओं का वीआइपी मोह
वीआइपी जताने के लिए खंडवा के नेताओं से हूटर को मोह नहीं छूट रहा है. स्वयं को विशेष बताने के लिए नियमों को रौंद कर अपने वाहनों पर हूटर लगाकर वे घूम रहे हैं. सरकार ने लाल पीली बत्ती तो उतरवा दी, लेकिन माननीय से लेकर उनके संगठन के पदाधिकारी हूटर के मोह से बाहर नहीं निकल पाए. यही वजह है कि खंडवा जैसे छोटे शहर में भी हूटर लगे वाहनों की भरमार ही गई है. जनप्रतिनिधि व संगठन के पदों पर काबिज पदाधिकारी अपने वाहनों पर हूटर लगा रखे हैं. इस तरह से नियमों की अनदेखी की जा रही है. अब इस पर नकेल करने के लिए पुलिस मुख्यालय भोपाल ने इन्हें हटाने के आदेश जारी कर दिए हैं. अब देखना है कि आदेश का पालन होता है कि नहीं.
मोहन ने मोहा, ताकते रह गए भूरिया
झाबुआ में भगोरिया के माध्यम से आदिवासियों में पैठ बनाने का सिलसिला वरिष्ठ कांग्रेसी नेता कांतिलाल भूरिया का वर्षों से चला आ रहा है. आदिवासियों के महत्वपूर्ण पर्व भगोरिया में शामिल होने क्षेत्र के दूर-दराज के गांवों तक के पंच, सरपंच, तड़वी शामिल होते हैं. वोटरों पर इनका अच्छा खासा प्रभाव रहता है. पर्व ऐसा अवसर रहता है, जिसमें भूरिया रणनीतिक जमावट करते रहे हैं, लेकिन इस बार मौका उनके हाथ से निकल गया.
वे केवल छुटपुट मिलन समारोह तक सीमित रह गए, मुख्यमंत्री मोहन यादव के भगोरिया के साथ भील सम्मेलन में शिरकत करने से सारा समां वे लूट ले गए. क्षेत्र के आदिवासियों खासकर युवाओं के लिए अनेक घोषणा कर उन्होंने उनका दिल जीत लिया. झाबुआ में मेडिकल कॉलेज की घोषणा, मेडिकल कॉलेज सहित अन्य प्रोफेशनल कोर्स में जनजातीय विद्यार्थियों के लिए निशुल्क कोचिंग क्लास शुरू करने की बात से उन्होंने युवाओं का मन मोह लिया और भूरिया ताकते रह गए
