नयी दिल्ली, 22 फरवरी (वार्ता) युवा कांग्रेस लीगल सेल ने शनिवार को कहा कि सरकार संसद में अधिवक्ता (संशोधन) विधेयक 2025 ला रही है जिसके कुछ प्रावधान अधिवक्ताओं की स्वायत्तता, अधिकारों और गरिमा के लिए गंभीर खतरा है।
युवा कांग्रेस के अध्यक्ष उदय भानु चिब ने आज यहां जारी एक बयान में कहा है कि अधिवक्ता (संशोधन) विधेयक लेकर भाजपा सरकार लोकतंत्र पर एक और हमला कर रही है। इस विधेयक का उद्देश्य कानूनी बिरादरी को चुप कराना और न्यायपालिका की स्वतंत्रता को खत्म करना है।
उन्होंने कहा,”विधेयक में धारा 35A जोड़ी गई है, जिसमें अधिवक्ताओं और बार एसोसिएशनों द्वारा किसी भी प्रकार की हड़ताल या न्यायिक कार्य से बहिष्कार को पेशेवर कदाचार माना गया है। यह पूर्ण प्रतिबंध न्यायिक सुधारों के लिए शांतिपूर्ण विरोधों की महत्ता को नज़रअंदाज़ कर न्याय प्रणाली की खामियों को उजागर करने के अवसरों को समाप्त करता है। यह प्रावधान अधिवक्ताओं के संघर्ष और असहमति व्यक्त करने के अधिकार को छीनने का प्रयास है और यह कोशिश अभिव्यक्ति और सभा की स्वतंत्रता जैसे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।”
श्री चिब ने कहा,”यह संशोधन बार काउंसिल ऑफ इंडिया पर सरकारी नियंत्रण बढ़ाने का प्रयास है। संशोधन के तहत केंद्र सरकार को बार काउंसिल ऑफ इंडिया में तीन सदस्यों को नामित करने का अधिकार दिया गया है। इससे कौंसिल की स्वतंत्रता प्रभावित होगी और सरकारी हस्तक्षेप की आशंका बढ़ेगी।”
युवा कांग्रेस लीगल सेल के प्रमुख रूपेश सिंह भदौरिया ने कहा,”हम, महात्मा के शिष्यों और संविधान के पैदल सैनिकों के रूप में, हमेशा भारतीय समाज को आकार देने में स्वतंत्रता से लेकर आज तक एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं।”
