
थार वाहन में तोड़फोड़ करने वाले पुलिसकर्मी बचे
नव भारत न्यूज
इंदौर. बाणगंगा थाना क्षेत्र में एसआई के साथ मारपीट और अपहरण के मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है. पहले आरोपियों को पकड़ने के दौरान थार गाड़ी में तोड़फोड़ करने वाले पुलिसकर्मियों का वीडियो वायरल हुआ, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई. अब एक नया विवाद खड़ा हो गया है, पुलिस द्वारा प्लास्टर में जुलूस निकालने वाले आरोपियों के शरीर पर मेडिकल जांच में एक भी चोट के निशान नहीं मिले. पुलिस वालों ने आरोपियों के पैर और हाथों में नकली प्लास्टर चढ़वाया था. जिसकी अब जांच की जा रही है.
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले बाणगंगा थाना क्षेत्र में एसआई तेरेश्वर इक्का पर हमला कर उनकी थार गाड़ी से अपहरण कर लिया गया था. पुलिस ने इस मामले में जेल प्रहरी सहित चार लोगों को गिरफ्तार किया. गिरफ्तार किए गए दो आरोपियों को हाथ में प्लास्टर बांधकर जुलूस निकालते हुए पुलिस ने पेश किया. लेकिन जब वे जेल पहुंचे तो मेडिकल रिपोर्ट में उनके शरीर पर किसी भी चोट के निशान नहीं मिले. मेडिकल रिपोर्ट से यह सवाल खड़ा हो गया कि पुलिस ने क्या दिखावे के लिए आरोपियों को प्लास्टर चढ़ाया था. वरिष्ठ अधिकारी अब इस पूरे मामले की जांच करवा रहे हैं. लेकिन इससे पहले, वायरल वीडियो में पुलिसकर्मी जेल प्रहरी की थार गाड़ी में डंडे से तोड़फोड़ करते दिखे थे. इसके बावजूद उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिससे यह साफ हो गया कि जब गलती पुलिसकर्मियों की होती है तो जांच आगे नहीं बढ़ती. पुलिस ने आरोपियों को दिखावे के लिए प्लास्टर में घुमाया, लेकिन असली तोड़फोड़ करने वाले पुलिसकर्मियों पर कोई आंच नहीं आई.
कार्यशैली पर उठ रहे सवाल
इस पूरे मामले में पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह निष्पक्ष जांच हो रही है या फिर अपने ही कर्मचारियों को बचाने की कोशिश की जा रही है. अब देखना यह होगा कि वरिष्ठ अधिकारी इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और क्या पुलिस की छवि सुधारने के लिए निष्पक्ष जांच होती है या नहीं.
