
खांड समिति में धान गायब पर समिति प्रबंधक सहित अन्य की भूमिका संदिग्ध
नवभारत, जबलपुर। धान खरीदी में हुई हेराफेरी में मझौली की खांड समिति में एस और दिलचस्प मामला सामने आया है। धान खरीदी में जो धान समिति से गायब है, उसकी एंट्री एक कच्ची पर्ची में है, जिस पर समिति प्रबंधक के हस्ताक्षर दिखाई दे रहे हैं, जिसके आधार पर ही उक्त धान को पोर्टल में चढ़ा दिया है। नियमानुसार पहले किसान की एंट्री की जाती है और फिर उसके बाद वह पर्ची केंद्र प्रभारी द्वारा साइन करके ऑपरेटर को दी जाती थी और फिर ऑपरेटर उस पर्ची के आधार पर उक्त किसान के नाम पर उक्त मात्रा की एंट्री को चढ़ता है। इसके अलावा इस पूरे मामले में केंद्र प्रभारी गोदाम संचालक पर गोलमाल का आरोप लगा रहा है। वहीं ऑपरेटर पर्ची का हवाला देकर एंट्री की बात कर रहा है, जिसमें पर्ची पर केंद्र प्रभारी के हस्ताक्षर दिखाई दे रहे हैं।
क्या है मामला
विदित है कि मझौली की खांड समिति के केंद्र क्रमांक 1 में जांच के दौरान 6000 क्विंटल धान कम पाई गई है। जिसका समर्थन मूल्य 1 करोड़ 38 लाख रुपए है। जिसमें केंद्र प्रभारी ऑपरेटर के साथ-साथ सर्वेयर की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है। वहीं जब 6 सदस्य जांच दल मौके पर गया हुआ था, इस दौरान सर्वेयर ने अपना मोबाइल बंद कर लिया और वह मौके पर मौजूद नहीं रहा, ऐसे में आशंका व्यक्त की जा रही है कि इस पूरे गोलमाल में उक्त सर्वेयर की भूमिका महत्वपूर्ण थी।
दूसरे केंद्र पर भी फर्जी धान घोटाला
मझौली की सेवा सहकारी समिति खांड द्वारा दूसरे केंद्र मां रेवा वेयरहाउस में की गई धान खरीदी का खुलासा हुआ है। इस केंद्र पर भी उक्त समिति ने धान की फर्जी एंट्री कर ली है। जिसमें लगभग 63 सौ क्विंटल धान को फर्जी तरीके से चढ़ा दिया गया है। 63 सौ क्विंटल फनी धान खरीदी मामले में खरीदी केन्द्र को धान बेचने वाले लगभग 50-60 किसान ऐसे हैं जो हर रोज सोसायटी के चक्कर लगा रहे हैं। कुछ किसानों ने स्पष्ट आरोप लगाए हैं कि यहां पर जितनी भी खरीदी हुई है, वह वेयरहाउस संचालक नीतेश पटेल ने की है। उनका आरोप है कि लगभग 4 किलो प्रति क्विंटल धान भी अतिरिक्त कमीशन के रूप में दी है।
