वन विभाग की छापेमारी में करंट लगाने वाले तार, खूटी, वन्य प्राणियों के अवशेष मिले
जबलपुर: वन परिक्षेत्र जबलपुर अंतर्गत पिपरिया में 1 फरवरी को किए गए तेंदुए के शिकार मामले में वन विभाग की टीम ने बड़ी कार्यवाही करते हुए पांच शिकारियों को धरदबोचा। पकड़े गए आरोपियों द्वारा पूर्व में भी कई बार वन्य प्राणियों का करंट लगाकर शिकार किया जा चुका है। वन अमले ने जब शिकारियोंं के घर में छापा मारा कार्यवाही की तो वहां से करंट लगाने वाली तार, खूटी और अन्य वन्य प्राणियों के अवशेष मिले है जिसे नानाजी देशमुख पशुचिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय में परीक्षण के लिए भेजा गया है।
विदित हो कि पिपरिया वन परिक्षेत्र जबलपुर में एक फरवरी को एक तेंदुआ मृत मिला था। जिसके बाद वन अमला अलर्ट मोड में आया और डॉग स्क्वॉड की सहायता से घटना स्थल एवं उसके आस पास छानबीन की गई। देवरी गांव समेत अन्य स्थानों में सर्चिंग हुई। एक बंद कमरे की सर्चिंग के दौरान हथियारों का जखीरा समेत अन्य सामान मिला था। जिस पर प्रकरण दर्ज कर शिकारियों की तलाश शुरू हुई। गुरूवार को मुख्य वन संरक्षक कमल अरोरा, वनमंडल अधिकारी ऋषि मिश्र, उपवनमंडल अधिकारी पीके श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में वन परिक्षेत्र अधिकारी जबलपुर अपूर्व प्रखर शर्मा एवं परिक्षेत्र सहायक महेश मिश्रा(बारहा), विजय तिवारी(बरेला), गुलाब सिंह (जबलपुर)अन्य कर्मचारियों ने तेंदुए के शिकार में लखन कुलस्ते, सत्येंद्र बरकडे, राधेश्याम यादव, सुरेंद्र मरावी, देवी सिंह को गिरफ्तार कर न्यायलय में प्रस्तुत किया है।
तेंदुए के नाखून नदी के पास छुपाये
आरोपी सुरेंद्र मरावी द्वारा पूछताछ में यह भी स्वीकार किया गया कि उन्होंने तेंदुए के नाखून निकाल लिए थे और उसे नदी के पास छुपा दिया है। वन विभाग की एक टीम ने अभियुक्त सुरेंद्र मरावी के साथ ग्राम करौंधी में नदी के पास जहां नाखुन छुपाये थे वहाँ पहुंची और पाँच नग नाखून जप्त किए जिसे नानाजी देशमुख पशुचिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय में परीक्षण के लिए भेजा गया है।
अन्य शिकारियों की जुटाई जा रही जानकारी
वन परिक्षेत्र जबलपुर अमले द्वारा लगातार इस मामले में जांच की जा रही है और इसमें अन्य लोगों का भी पता लगाया जा रहा है एवं शेष नाखूनों के लिए तलाशी जारी है।
