प्रोजेक्ट हैंडओवर करने में हो रही देरी, समय पर बन रही पगार
जबलपुर:स्मार्ट सिटी से जुड़े जानकारों की माने तो अगले महीने मार्च से कर्मचारियों को छांटने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। हालांकि स्मार्ट सिटी के सीईओ की माने तो बोर्ड मेंबर द्वारा मीटिंग बुलाकर इस पर फैसला लिया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि कुछ कर्मचारियो को सिटी सेकेंड फेंस प्रोजेक्ट में शिफ्ट किया जा सकता है। अभी फिलहाल विभाग की ओर से कोई भी आदेश नहीं आया है। लेकिन, जानकारों कि माने तो अधिकांश कर्मचारियों और अधिकारियों की सिटी फेस टू प्रोजेक्ट में जरूरत नहीं है।
ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस फंड से हो रहा भुगतान
पड़ताल करने पर पता चला कि जिम्मेदारों द्वारा तैयार किए प्रोजेक्ट से लागत तो निकाल ली जाती है और ऑपरेशन एण्ड मेंटेनेंस फंड से कर्मचारियों व अधिकारियों के वेतन का भुगतान हो रहा है। केन्द्र सरकार से स्मार्ट सिटी जबलपुर को लगभग 1050 करोड़ रुपये अनुदान के रूप में मिले थे। इस राशि से एरिया बेस्ड डेवलपमेंट का प्लान राइट टाउन, नेपियर टाउन और गोलबाजार के लिए बनाया गया था। ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस फंड राशि केंद्र सरकार से मिले अनुदान का हिस्सा रहती है। लेकिन इस राशि का 10 प्रतिशत एक अलग मद में रख लिया जाता है। जिस को देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि इन्हें आज भी मुफ्त की पगार स्मार्ट सिटी द्वारा दी जा रही है।
किएं जाए निगम के हवाले
नियमों के हिसाब से जब स्मार्ट सिटी द्वारा प्रोजेक्ट पूरे कर लिए गए है तो इन्हें निगम को सौंप देना चाहिए। लेकिन स्मार्ट सिटी के अधिकारी प्रोजेक्ट को हैण्डओवर करने में देर कर रहे हैं, ताकि उनकी पगार बराबर मिलती रहे। स्मार्ट सिटी के जितने भी प्रोजेक्ट पूरे हो चुके हैं, उनसे स्मार्ट सिटी को कोई आमदनी नहीं हो रही है। सूत्रों के मुताबिक स्मार्ट सिटी ने लगभग 105 करोड़ रुपए की राशि पहले ही अपने वेतन और खर्चे के लिए आरक्षित कर ली जाती हैं।
इनका कहना है
अभी फिलहाल कर्मचारियों के शिफ्टिंग को लेकर कोई भी आदेश नहीं आया है। बोर्ड मीटिंग में इस प्रस्ताव पर चर्चा की जाएगी।
अनुराग सिंह, सीईओ, स्मार्ट सिटी
