
जबलपुर। सीबीआई ने सोमवार को रिमाँड खत्म होने पर रिश्वतखोर सीजीएसटी अधिकारियों को न्यायालय में पेश किया जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है। रिमांड के दौरान सीबीआई ने अधिकारियों से लंबी पूछताछ की है। इसके अलावा जांच के नाम पर रिकवरी, टैक्स पर कारवाई का डर दिखाकर अब तक उन्होंने कितनों को शिकार बनाया और इसमें और कौन-कौन शामिल है समेत अन्य बिन्दुओं पर भी खोजबीन की गई, जांच में नई जानकारियां सीबीआई को हाथ लगी जिस पर जांच पड़ताल जारी है।
विदित हो कि होटल संचालक विवेक त्रिपाठी ने सीबीआई जबलपुर में शिकायत कर बताया था कि वे सतपुरा इंफ्राकॉन प्राइवेट लिमिटेड जबलपुर के निदेशक हैं और जबलपुर में उनके चार होटल हैं। वर्ष 2018-19 में उनके एक होटल, सुकून सिटी व्यू का ओयो कंपनी के साथ संबद्धता थी। ओयो कंपनी से संबंधित जीएसटी का मामला जबलपुर के सीजीएसटी कार्यालय में लंबित है और इस संबंध में उनके होटल को करों के बकाया के लिए एक कारण बताओ नोटिस भेजा गया था। सीजीएसटी विभाग ने उनसे उनके होटल, सुकून सिटी व्यू जबलपुर के दस्तावेज और रिकॉर्ड उपलब्ध कराने को कहा था और उन्होंने नोटिस के लिखित उत्तर के माध्यम से सुकून सिटी व्यू के सभी दस्तावेज और रिकॉर्ड बैंक स्टेटमेंट के साथ सीजीएसटी विभाग को पहले ही जमा कर दिए हैं। हालांकि, जबलपुर के सीजीएसटी इंस्पेक्टर सचिन खरे अपने होटल के खिलाफ मामला बंद करने और अपने पक्ष में आदेश देने के बदले में 4,00,000 रुपये की अवैध रिश्वत की मांग की। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों से अपना काम करवाने का आश्वासन भी दिया। रिश्वत की मांग के सत्यापन के दौरान, शिकायतकर्ता ने जबलपुर स्थित सीजीएसटी कार्यालय में निरीक्षक सचिन खरे और अधीक्षक बर्मन से बातचीत की गई थी। सीए हर्षित खंडेलवाल भी लंबित कार्यों और लोक सेवकों द्वारा रिश्वत की मांग के संबंध में हुई चर्चा में शामिल हुए थे इसके बाद आगे की सत्यापन कार्यवाही की गई। जिसके बाद सीबीआई ने 17 दिसम्बर को जाल बिछाया और सीजीएसटी कार्यालय में दबिश देते हुए रिश्वत लेते रंगे हाथों सचिन खरे, निरीक्षक, उप, सहायक आयुक्त विवेक वर्मा को रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया था। दोनों को सोमवार तक रिमांड पर लिया गया था।
