धरती को बचाने की यात्रा है ‘वाटरशेड यात्रा’ : शिवराज

भोपाल, 05 फरवरी (वार्ता) केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज कहा कि ‘वाटरशेड यात्रा’ सिर्फ एक यात्रा नहीं बल्कि धरती को बचाने की यात्रा है और पानी को बचाने के लिए सरकारों के साथ समाज का सहयोग भी आवश्यक है।

श्री चौहान ने आज यहां ‘वाटरशेड यात्रा’ का उद्घाटन किया। भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग ने परियोजना क्षेत्रों में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (डब्ल्यूडीसी-पीएमकेएसवाई 2.0) के वाटरशेड विकास घटक के तहत किए गए वाटरशेड विकास गतिविधियों के बारे में लोगों की भागीदारी बढ़ाने और जागरुकता पैदा करने के लिए एक व्यापक अभियान ‘वाटरशेड यात्रा’ प्रारंभ किया है।

इस दौरान श्री चौहान ने अपने संबोधन में कहा कि जल हमारे जीवन का आधार है, तो वहीं मिट्टी हमारा अस्तित्व है। जल और मिट्टी दोनों ठीक दशा में न रहें, तो जिंदगी की दशा क्या होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दूरदर्शी हैं, वो आने वाले 100 साल की सोचते हैं। आने वाले कल में हमारी पीढ़ियाँ कैसे जीवित रहेंगी, इस बारे में सोचना पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि पानी आज विश्व का सबसे बड़ा मुद्दा है। घाटों का क्षरण हो रहा है, कई जगह जमीन बंजर हो रही है।प्रधानमंत्री श्री मोदी की दूरदर्शी सोच के कारण भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय का भूमि संसाधन विभाग मिट्टी और जल संरक्षण के लिए पीएम कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत वॉटरशेड विकास घटक की योजना को क्रियान्वित कर रहा है।इस वॉटरशेड के अंतर्गत चेक डेम, बोरी बंधान, मेढ़ बंधान, खेत तालाब जैसी कई संरचनाएं बनाई जाएंगी। ये पानी भी बचाएगा और माटी के क्षरण को रोकेगा। भरा हुआ सतही जल आस पास के बड़े इलाके में भूजल स्तर बढ़ा देगा। इस योजना के साथ सभी जुड़ें। ये काम अकेले सरकार नहीं कर सकती, सरकार के साथ समाज का सहयोग जरूरी है।

उन्होंने जनता का आह्वान करते हुए कहा कि हर गाँव, किसानों को, पंचायतों, जनप्रतिनिधिओं, गैरसरकारी संगठनों और स्वसहायता समूहों को इससे जोड़ना है। इसके लिए हमने वॉटरशेड यात्रा निकालने का संकल्प लिया है। ये महज यात्रा नहीं, धरती को बचाने की यात्रा है।

श्री चौहान ने कहा कि इस यात्रा के दौरान पानी और माटी बचाने के लिए जनजागरण अभियान चलेगा और वॉटरशेड के अंतर्गत पूर्ण किये गए कामों का लोकार्पण होगा, नए कामों का भूमिपूजन होगा। वॉटरशेड महोत्सव मनाया जाएगा। ये वॉटरशेड यात्रा देशभर में जलसंचयन और भूमि संरक्षण को बढ़ावा देगी।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आगामी दो वर्षों के लिए जनभागीदारी प्रतियोगिता की शुरुआत की जा रही है। अगर जनभागीदारी से बेहतर जल संरचना बना कर भूमिक्षरण को रोकते हैं तो श्रेष्ठ काम करने वाले परियोजनाओं को अतिरिक्त 20 लाख रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा। इसके लिए 70 करोड़ 80 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है। हर साल 177 परियोजनाएँ इससे लाभान्वित होंगी। इस वर्ष की प्रतियोगिता के लिए परियोजना का मूल्यांकन अप्रैल में किया जाएगा।

 

 

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