गांधीनगर | देश के औद्योगिक पावरहाउस गुजरात से बेहद चिंताजनक खबरें आ रही हैं, जहाँ आर्थिक रीढ़ मानी जाने वाली हजारों इकाइयां अस्तित्व के संकट से जूझ रही हैं। राज्य की 4,11,733 पंजीकृत औद्योगिक इकाइयों में से वर्तमान में 28,517 इकाइयों में उत्पादन या तो बंद हो गया है या क्षमता से काफी कम चल रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 1,212 इकाइयां पूरी तरह बंद हो चुकी हैं। कच्चे माल की आसमान छूती कीमतों और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन में आई बाधाओं ने गुजरात के कारखानों में मशीनों के शोर को सन्नाटे में बदल दिया है।
इस संकट का सबसे भीषण असर दुनिया के सिरेमिक हब ‘मोरबी’ और कपड़ों की राजधानी ‘सूरत’ में देखने को मिल रहा है। मोरबी की लगभग 670 सिरेमिक फैक्ट्रियों में से 450 ने कामकाज पूरी तरह बंद कर दिया है, जिससे श्रमिकों के पलायन की स्थिति बन रही है। इसी तरह, सूरत का टेक्सटाइल उद्योग और अहमदाबाद का केमिकल सेक्टर भी रसद (लॉजिस्टिक्स) और परिवहन की ऊंची लागत के कारण उत्पादन में भारी गिरावट दर्ज कर रहा है। गुजरात चैंबर ऑफ कॉमर्स का मानना है कि शिपिंग लागत में उछाल ने छोटे उद्योगों की कमर तोड़ दी है।
राज्य सरकार ने इस स्थिति को ऊर्जा संकट से जोड़ने से इनकार करते हुए इसे ‘व्यावहारिक बाधा’ करार दिया है। उद्योग आयुक्त के.सी. संपत के अनुसार, सरकार स्थिति को सामान्य करने के लिए रसायनों पर टैक्स में कटौती और नियमों में ढील जैसे महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। वैकल्पिक ईंधन अपनाने वाली फैक्ट्रियों के लिए अनुपालन नियमों को आसान बनाया गया है और मजबूत गैस पाइपलाइन नेटवर्क का लाभ देने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, जमीनी हकीकत बताती है कि यदि सप्लाई चेन की समस्याएं जल्द हल नहीं हुईं, तो राज्य के राजस्व और रोजगार पर गहरा असर पड़ना तय है।

