उड़ीसा उच्च न्यायालय ने प्रशासनिक अधिकारियों की अवैध हड़ताल पर सरकार को जारी किया नोटिस

भुवनेश्वर, 09 दिसंबर (वार्ता) उड़ीसा उच्च न्यायालय ने जून में कई दिनों तक प्रशासनिक कार्यों को ठप कर हड़ताल पर गए सरकारी अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग को लेकर पेश जनहित याचिका पर मंगलवार को राज्य के मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया।

मुख्य न्यायाधीश हरीश टंडन और न्यायमूर्ति एम.एस.रमन की पीठ ने कटक के सामाजिक कार्यकर्ता प्रताप चंद्र साहू की याचिका पर संज्ञान लेते हुए सरकार से इस संबंध में रिपोर्ट का पालन करने के लिए कहा है।

स्थानीय भारतीय जनता पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा गत 30 जून को भुवनेश्वर नगर निगम (बीएमसी) के एक वरिष्ठ अधिकारी पर किए गए हमले के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए ओडिशा प्रशासनिक सेवा संघ (ओएएसए) एवं राजस्व अधिकारियों ने स्थानीय भाजपा नेता की गिरफ्तारी और अधिकारियों को उनके कर्तव्य का सुचारू रूप से निर्वहन करने के लिए सुरक्षा प्रदान करने की मांग करते हुए सामूहिक अवकाश लेकर काम बंद कर दिया था। प्रशासनिक अधिकारियों के सेवा से गायब रहने के कारण जिला मुख्यालय, उप-मंडल और ब्लॉकों के सार्वजनिक कार्यालयों का दैनिक कामकाज कई दिनों से लगभग ठप पड़ा हुआ था, जिससे आम जनता प्रभावित हो रही थी।

याचिकाकर्ता के अनुसार, इस तरह के आंदोलन से कानून के शासन एवं उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों के निर्देशों की अवहेलना हुई। याचिकाकर्ता के वकील अनूप कुमार महापात्रा ने कहा कि यह “उड़ीसा सरकारी कर्मचारी आचरण नियम, 1959” का भी घोर उल्लंघन है जो सरकारी अधिकारियों द्वारा किसी भी प्रकार की हड़ताल पर प्रतिबंध लगाता है। उन्होंने तर्क दिया कि यद्यपि अधिकारियों की ‘अवैध’ हड़ताल के कई महीने बीत चुके हैं लेकिन राज्य सरकार इस मामले को दबाए हुई है और प्रशासनिक कार्य को ठप करने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अभी तक अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू नहीं की है।

ओडिशा प्रशासनिक सेवा और ओडिशा राजस्व सेवा के अधिकारी ब्लॉक, तहसील और जिला स्तर पर सार्वजनिक सेवाएं प्रदान करने और शासन में गड़बड़ी के खिलाफ कार्रवाई करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

याचिका में कहा गया है कि जो सरकारी कर्मचारी आम हड़ताल में शामिल होते हैं, जिससे जनता का सामान्य जीवन एवं सरकारी खजाना प्रभावित होता है, वे संविधान के अनुच्छेद 19 (सी) के अंतर्गत संरक्षण प्राप्त करने के हकदार नहीं हैं और यह ओडिशा सरकारी कर्मचारी आचरण नियम, 1959 के प्रावधानों का भी उल्लंघन है। याचिका में कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है।

 

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