
जबलपुर। राष्ट्रीय हरित अधिकरण एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव की अध्यक्षता वाली युगलपीठ ने जबलपुर में नालों के कुप्रबंधन पर स्वत: संज्ञान आधारित सुनवाई की। इसी के साथ नगर निगम जबलपुर के आयुक्त को आगामी सुवाई तिथि 26 अप्रैल 2026 को सभी बिंदुओं पर विस्तृत तथ्यात्मक रिपोर्ट सहित व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने के निर्देश दे दिये।
एनजीटी ने चिंता जाहिर करते हुए कहा कि निगम ने नालों के उद्देश्य, प्रवाह की मात्रा व गुणवत्ता और अतिक्रमणों की पूरी जानकारी नहीं दी है। नालों के कुप्रबंधन व उनमें सीवेज बहाने की गंभीर स्थिति की चिंताजनक है। एनजीटी ने कहा कि ओमती और मोती नाला की चौड़ाई 80 फीट से घटाकर 40 फीट किए जाने और इस प्रक्रिया में 374 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद नालों में मलबा भरा हुआ है। कंक्रीट के खंभे और ढकाव से सफाई और जल प्रवाह बाधित होने की गंभीर शिकायत सामने आई है। सुनवाई के दौरान नगर निगम जबलपुर ने मदन महल क्षेत्र में अतिक्रमणों की बात स्वीकार की और हटाने की कार्रवाई शुरू करने का दावा किया। यह भी बताया गया कि राज्य लोक निर्माण विभाग ने पुल निर्माण हेतु नाले के मध्य खंभे बनाए हैं, जिनसे प्रवाह प्रभावित हुआ है। विभाग ने दावा किया कि अवरोध वाले हिस्से में बायपास ड्रेन बनाई गई है। निगम ने बताया कि नालों की सफाई मशीनों व मैनुअल विधियों से की जा रही है। प्राथमिक नालों की पूरी तरह यांत्रिक सफाई हुई है। द्वितीयक नाले मैनुअल व मशीन मिश्रित प्रणाली से साफ किए जा रहे हैं। तृतीयक नालों की सफाई कर्मियों द्वारा मैनुअल सफाई की जा रही है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने बताया कि अधिकांश घर सीवरेज नेटवर्क से जुड़े नहीं हैं और सीवेज सीधे नालों में बह रहा है। जबलपुर के एसटीपी की कुल क्षमता 154.38 एमएलडी है, परंतु केवल 58.745 एमएलडी का ही उपयोग हो रहा है। मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निरीक्षण में पाया गया कि फ्लाईओवर के खंभों से ओमती नाले का प्राकृतिक प्रवाह अवरुद्ध हुआ है। नालों की चौड़ाई कम कर पक्कीकरण किया गया है, जिससे वर्षा ऋतु में जलभराव की स्थिति बनती है। नालों की नियमित सफाई नहीं हो रही है।
