भारत आर्थिक ही नहीं, सांस्कृतिक महाशक्ति एवं विश्वबंधु बन कर उभर रहा है: मुर्मु

नयी दिल्ली 31 जनवरी (वार्ता) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शुकवार को कहा कि भारत ‘आर्थिक महाशक्ति’ बनने के साथ ही ‘सांस्कृतिक महाशक्ति’ एवं मुसीबत में सहयोगी ‘विश्वबंधु’ के रूप में तेजी से उभर रहा है तथा पूरी दुनिया इसे स्वीकार कर रही है और प्रेरणा ले रही है।

श्रीमती मुर्मु ने संसद के बजट सत्र के पहले दिन दोनों सदनों के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करते हुए कहा, “मेरी सरकार के प्रयासों से आज विश्व के सांस्कृतिक मंच पर भारत ने वैश्विक नेता (ग्लोबल लीडर) की पहचान बनाई है। सभी एशियाई बौद्ध देशों को आपस में जोड़ने के लिए, मेरी सरकार ने पहले ‘एशियाई बौद्ध सम्मेलन’ का आयोजन किया। पिछले वर्ष विश्व धरोहर समिति की बैठक का आयोजन भी भारत में हुआ जिसमें 140 देशों ने भाग लिया।”

राष्ट्रपति ने कहा अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के माध्यम से पूरा विश्व आज भारत की योग परंपरा को अंगीकार कर रहा है। वैश्विक अस्थिरता के वातावरण में भारत आर्थिक, सामाजिक और राजनैतिक स्थिरता का स्तम्भ बनकर विश्व के सामने आदर्श प्रस्तुत कर रहा है। चाहे जी7 शिखर सम्मेलन हो, क्वाड, ब्रिक्स, एससीओ हो या जी20, भारत के सामर्थ्य, नीति और नीयत पर पूरे विश्व ने भरोसा जताया है।

उन्होंने कहा कि आज बड़े से बड़े वैश्विक मंच पर भी भारत अपने हितों को मजबूती के साथ आगे रखता है। जी20 का सफल आयोजन और दिल्ली घोषणापत्र इसका उदाहरण है। तीसरा वैश्विक दक्षिण शिखर सम्मेलन, भारत आसियान शिखर सम्मेलन और भारत कैरीकॉम शिखर सम्मेलन में हमने वैश्विक दक्षिण से जुड़े विषयों को अभिव्यक्ति दी है। हमने समिट ऑफ द फ्यूचर में भारत का “विजन फॉर फ्यूचर” रखा है।

उन्होंने कहा कि इसी माह सरकार द्वारा भुवनेश्वर में प्रवासी भारतीय दिवस का आयोजन किया गया। प्रवासी भाई-बहनों की सुविधा-सहूलियत हमारी प्राथमिकता है, इसलिए सरकार ने छह नए दूतावास और चार नए वाणिज्यिक दूतावास खोलने का निर्णय लिया गया है।

श्रीमती मुर्मू ने कहा, “विश्व बंधु की छवि मजबूत करते हुए विश्व में कई आपदाग्रस्त इलाकों में भारत ने तुरंत सहायता भरा हाथ बढ़ाया है। भारत ने कई देशों के साथ अपना डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर साझा किया है और जन औषधि केंद्र स्थापित किए हैं।”

उन्होंने कहा, “प्रगति की भव्य इमारत को नई बुलंदियों तक ले जाने के लिए मजबूत स्तंभों की जरूरत होती है। भारत के विकास के लिए मेरी सरकार ने सुधार, क्रियान्वयन और परिवर्तन के ऐसे ही तीन मजबूत स्तंभ बनाए हैं। आज ये शब्द पूरी दुनिया में भारत के नए सुशासन मॉडल का पर्याय बन गए हैं।” उन्होंने कहा कि आधुनिक ढांचागत विकास से नागरिकों को एक बेहतर जीवन एवं देश को नई पहचान मिलने के साथ ही देश के लोगों में नया आत्मविश्वास भी पैदा हो रहा है। देश ने बीते दशक में विश्व स्तरीय ढांचागत व्यवस्था के निर्माण के कई मील के पत्थर तय किए हैं। इससे दुनिया में भारत की छवि मजबूत हुई है और निवेशकों का भारत के प्रति भरोसा बढ़ा है, उद्योगों को बल मिला है।

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