नयी दिल्ली, (वार्ता) वर्ल्ड ट्रेड सेंटर्स (डब्ल्यूटीसी) बिजनेस एंड इंडस्ट्री एसोसिएशन ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को केंद्रीय बजट 2025 में शिक्षा क्षेत्र में सुधार के लिए सुझावों की एक व्यापक सूची प्रस्तुत की है जिसमें शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के प्रशिक्षण में निवेश करने वाली कंपनियों के लिए आकर्षक कर प्रोत्साहन प्रदान करने और युवाओं को उद्योग-प्रासंगिक अनुभव प्रदान करने के लिए कार्य से जुड़े शिक्षण कार्यक्रमों का विस्तार करने की सिफारिश भी है।
एसोसिएशन ने प्रौद्योगिकी को समन्वित करने तथा उद्योग एवं अकादमिक संस्थानों की भागीदारी को प्रोत्साहित करने जैसे कई सुझाव दिए हैं ।
डब्ल्यूटीसी एसोसिएशन की मंगलवार को जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार ये सिफारिशें शिक्षा क्षेत्र के प्रमुख हितधारकों के साथ एक व्यापक विचार-विमर्श सत्र में सामने आयी हैं। इन सिफारिशों का उद्देश्य भारतीय शिक्षा प्रणाली को आधुनिक बनाना है।
बयान में कहा गया है कि एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रदीप अग्रवाल की अध्यक्षता में हुए विचार-विमर्श सत्र में डॉ. अमित सक्सेना, श्रीमती स्तुति कक्कड़ (सेवानिवृत्त आईएएस), डॉ. ओलेक्सांद्र (भारत में यूक्रेन के राजदूत), संजीव आहूजा (उद्यमी) और दीपक द्विवेदी (पत्रकार) और एसोसिएशन के महानिदेशक डॉ. योगेश श्रीवास्तव तथा कई अन्य विशेषज्ञ शामिल थे।
शिक्षा में प्रौद्योगिकी का एकीकरण के बारे में एसोसिएशन का कहना है कि वैश्विक तकनीकी प्रगति के साथ तालमेल बिठाने के लिए पाठ्यक्रम में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और मशीन लर्निंग को शामिल करने के लिए एक मजबूत प्रयास किया जा रहा है। इसमें डिजिटल बुनियादी ढांचे में पर्याप्त निवेश, ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी को बढ़ाना और छात्रों के लिए किफायती उपकरण उपलब्ध कराना शामिल है।
संगठन ने शैक्षिक लागत को कम करने और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को आबादी में व्यापक रूप से सुलभ बनाने की सिफारिश की है।
वित्त मंत्री को प्रस्तुत ज्ञापन में पाठ्यक्रमों को प्रासंगिक बनाए रखने और छात्रों को वर्तमान बाजार की मांगों को पूरा करने वाले कौशल से लैस करने की जरूरत पर बल दिया गया है। इसके लिए शैक्षणिक संस्थानों और उद्योगों के बीच सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
एसोसिएशन ने डिजिटल प्रौद्योगिकी की खाईं पाटने के लिए डिजिटल बुनियादी ढांचे में सुधार और यह सुनिश्चित करने और इसके जरिए दूरदराज के इलाकों में रहने वाले छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शैक्षिक संसाधनों से जोड़ने का सुझाव दिया गया है।
