भोपाल, (वार्ता) आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने सहारा समूह से संबंधित निवेशकों के साथ धोखाधड़ी और जमीनें बेचकर निवेशकों की राशि नहीं लौटाने के मामले में प्रारंभिक जांच (पीई) पंजीबद्ध कर ली है।
ईओडब्ल्यू के अनुसार सहारा इंडिया रीयल ईस्टेट कार्पोरेशन लिमिटेड और सहारा हाउसिंग कार्पोरेशन इन्वेस्टमेंट समूह की ओर से विभिन्न शहरों में निवेशकों से धन जुटाकर “सहारा सिटी” बनाने के उद्देश्य से भूमि खरीदी गई थी। वर्ष 2014 में उच्चतम न्यायालय और ‘सेबी’ द्वारा सहारा समूह को निवेशकों की राशि लौटाने के लिए कंपनी की सम्पत्ति विक्रय करने की अनुमति दी गई थी। उच्चतम न्यायालय के आदेेशानुसार गाइड लाइन की सीमा अधिकतम 90 प्रतिशत या उससे अधिक तक तय की गई थी।
उच्चतम न्यायालय द्वारा विक्रय करने की अनुमति इस शर्त के साथ प्रदान की गई थी कि विक्रय से प्राप्त होने वाली राशि क्रेता द्वारा सीधे “सेबी-सहारा रिफंड खाता नंबर 012210110003740 बैंक आॅफ इंडिया, ब्रांद्रा, मुंबई महाराष्ट्र” में जमा की जायेगी। इस आदेश के तारतम्य में सहारा समूह की भोपाल के समीप स्थित लगभग 110 एकड़ जमीन 48 करोड़ रुपए में मेसर्स सिनाप रीयल ईस्टेट प्राइवेट लिमिटेड को, जबलपुर में लगभग 100 एकड़ जमीन 20 करोड़ रुपए में मेसर्स नायसा देवबिल्ड प्राइवेट लिमिटेड और कटनी में लगभग 100 एकड़ जमीन 20 करोड़ रुपए में मेसर्स नायसा देवबिल्ड प्राइवेट लिमिटेड को विक्रय की गई। इस प्रकार सहारा समूह द्वारा लगभग 310 एकड़ जमीन को लगभग 90 करोड़ रुपए में विक्रय कर दिया गया, जबकि केवल भोपाल में स्थित लगभग 110 एकड़ भूमि की कीमत स्वयं सहारा कम्पनी द्वारा वर्ष 2014 में उच्चतम न्यायालय के समक्ष मूल्यांकन उपरांत 125 करोड़ रुपए बताई गई थी।
भोपाल स्थित भूमि के विक्रय से प्राप्त राशि उच्चतम न्यायालय के आदेश से सेबी के खाते में जमा कराने के बावजूद भी सहारा समूह द्वारा आदेश का उल्लंघन करते हुए सहारा इंडिया रीयल ईस्टेट लिमिटेड, सहारा हाउसिंग इन्वेस्टमेंट कार्पोरेशन और निजी शैल कम्पनियों के खातों में जमा कराई गई। उच्चतम न्यायालय के आदेशानुसार विक्रय की राशि सेबी (निवेशकों के हित के लिये) के खाते में जमा नहीं करने से और आंतरिक रूप से उपयोग करने के कारण साथ ही आशुतोष दीक्षित की शिकायत पर दस्तावेजी साक्ष्य एकत्रित करने के लिए सहारा हाउसिंग कार्पोरेशन इन्वेस्टमेंट समूह के अधिकारी, कर्मचारियों, सहारा ग्रुप द्वारा विक्रय के लिए अधिकृत की गई विभिन्न विक्रेता कंपनियां और संबंधित राजस्व अधिकारियों एवं अन्य के विरुद्ध आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ द्वारा प्रारंभिक जांच आज पंजीबद्ध की गई है।
