
सिवनी से दो और आरोपी गिरफ्तार
इंदौर. उद्योगपति की बहू को डिजिटल अरेस्ट कर 1 करोड़ 60 लाख रुपए की ठगी करने के मामले में क्राइम ब्रांच ने सिवनी से दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया है. इससे पहले पुलिस इसी मामले एक दर्जन से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है.
क्राईम ब्रांच के एडीशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया ने बताया कि उद्योगपति की बहू से 1.60 करोड़ रुपए की ऑनलाइन ठगी के मामले में क्राइम ब्रांच ने तीन और आरोपियों को सिवनी जिले से गिरफ्तार किया है. इस मामले में अब तक कुल 16 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिनमें से 13 को पहले ही पकड़ा जा चुका है.
ग्रामीण क्षेत्रों से जुटाए सैकड़ों सिम कार्ड
आरोपियों ने पूछताछ में खुलासा किया कि उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में कैंप लगाकर फर्जी ई-केवाईसी और डी-केवाईसी के जरिए 450 से अधिक सिम कार्ड जारी किए। इन सिम कार्ड्स का उपयोग ठगी के लिए किया गया। फरियादी महिला को ठगने के लिए उपयोग किए गए वीडियो कॉल्स में भी इन्हीं सिम कार्ड्स का इस्तेमाल हुआ।
ठग गैंग का अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन
गिरफ्तार आरोपियों ने बताया कि वे भारत के अलावा लाओस जैसे देशों में भी सिम कार्ड्स सप्लाई कर चुके हैं। ठगी गैंग के सदस्यों ने व्हाट्सएप और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का उपयोग कर पीड़ितों को फंसाया।
कैसे किया गया फर्जीवाड़ा?
ई-केवाईसी: एक सिम तुरंत एक्टिवेट कर ग्राहक को दिया गया।
डी-केवाईसी: दूसरी सिम कुछ घंटों बाद एक्टिवेट होती थी, जिसे आरोपी अपने पास रख लेते थे।
ग्राहकों को इस बात की भनक भी नहीं लगती थी कि उनके नाम से एक और सिम चल रहा है।
तीन मुख्य आरोपी गिरफ्तार
गौरव तिवारी (22): सिवनी निवासी, जो पहले मोबाइल रिपेयरिंग का काम करता था और एयरटेल एजेंट के रूप में काम करते हुए सिम कार्ड्स इश्यू करता था।
योगेश पटले (24): खेती-किसानी में जुटा आरोपी, जिसने ठग गैंग के लिए सिम कार्ड्स जुटाए।
सुजल सूर्यवंशी (21): नल फिटिंग का काम करता था और लाओस स्थित ठग गैंग से जुड़ा हुआ था।
ठगी का तरीका
ठग गैंग ने 59 वर्षीय महिला को स्काइप और व्हाट्सएप पर वीडियो कॉल कर खुद को सरकारी अधिकारी (ष्टक्चढ्ढ, क्रक्चढ्ढ, पुलिस आदि) बताया।
महिला को मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने की धमकी देकर उसकी बैंकिंग और निजी जानकारी प्राप्त की।
उसके बैंक अकाउंट, एफडी और शेयरों से 1.60 करोड़ रुपए ठग लिए।
स्पेशल टीम की कार्रवाई
क्राइम ब्रांच की विशेष टीम लगातार आरोपियों की गिरफ्तारी और उनके नेटवर्क को उजागर करने में जुटी हुई है। पुलिस ने बताया कि रिमांड के दौरान और भी कई बड़े खुलासे होने की संभावना है।
वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश
इंदौर पुलिस कमिश्नरेट ने निर्देश दिए हैं कि ऑनलाइन ठगी के ऐसे मामलों में दोषियों को सख्त सजा दिलाने के लिए प्रभावी कार्रवाई की जाए।
