अडानी के खिलाफ जांच को लेकर अमेरिकी न्याय विभाग को सवालों के घेरे में लिया सांसद ने

नयी दिल्ली, 08 जनवरी (वार्ता) अमेरिका में निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी के एक वरिष्ठ सांसद ने अरबपति गौतम अडानी के खिलाफ अमेरिकी न्याय विभाग की जांच में अधिकार क्षेत्र, जांच के समय और उससे देश में निवेश के वातावरण तथा एक सहयोगी देश के साथ संभावित संबंध पर सवाल उठाए हैं और पूछा है कि इस जांच के पीछे कहीं जॉर्ज सोरोस का तो कोई संबंध नहीं है।

अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स रिपब्लिकन के सदस्य लांस गुडेन ने अटॉर्नी जनरल मेरिक बी गारलैंड को तीन पृष्ठ की कड़ी चिठ्ठी में कहा है कि भारत-प्रशांत सागरीय क्षेत्र में भारत अमेरिका के महत्वपूर्ण साथी देशों में है। इस तरह के इस तरह की चुनिंदा कार्रवाइयों से अमेरिका के गठबंधनों को नुकसान पहुंचने का खतरा है।

श्री गुडेन सदन की न्यायिक मामलों की समिति के सदस्य भी है।

उन्होंने पत्र में इस बात का भी संदेह किया है कि इस तरह की कार्रवाई बाइडेन सरकार के आखिरी दौर में शुरू की गयी है, इसका समय देखते हुए चिंताएं होती हैं कि कहीं यह सब केवल राष्ट्रपति ट्रम्प के लिए व्यवधान पैदा करने के लिए तो नहीं किया गया है।

श्री गुडेन ने लिखा कि अदानी पर आरोप में कथित तौर पर रिश्वत देने का है। इसमें किसी भी अमेरिकी पक्ष की कोई ठोस संलिप्तता या क्षति नहीं हुड़ी है। उन्होंने न्याय विभाग से ये सवाल भी पूछे हैं कि यदि मामला संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ महत्वपूर्ण सांठगांठ से जुड़ा है, तो डीओजे ने एक भी अमेरिकी पर अभियोग क्यों नहीं लगाया है? क्या इस कथित योजना में कोई अमेरिकी शामिल नहीं था? क्या आप भारत में न्याय लागू करना चाहते हैं?

उन्होंने ये भी सवाल किए हैं कि क्या न्याय विभाग इस मामले में शामिल भारतीय अधिकारियों के प्रत्यर्पण की मांग करेगा? यदि भारत प्रत्यर्पण अनुरोध का पालन करने से इनकार करता है और इस मामले पर एकमात्र अधिकार का दावा करता है, तो न्याय विभाग की आकस्मिक योजना क्या है? क्या न्याय विभाग या बिडेन प्रशासन इस मामले को अमेरिका और भारत जैसे सहयोगी के बीच एक अंतरराष्ट्रीय विवाद में बदलने के लिए तैयार है?

उन्होंने कहा है कि न्याय विभाग को अमेरिकी लोगों की बेहतर सेवा करने के लिए आने वाले प्रशासन के साथ सहयोग करना चाहिए। पत्र में कहा गया है, “निवर्तमान प्रशासन के एक अंग के रूप में, यह जनता के प्रति आपका कर्तव्य है कि आप ऐसी और जटिलताएं पैदा न करें जिससे अमेरिका की भू-राजनीतिक प्रतिष्ठा को खतरा उत्पन्न हो।”

उल्लेखनीय है कि अमेरिकी न्याय विभाग ने श्री अडानी, उनके कुछ सहयोगियों और कंपिनयों के विरुद्ध वहां कानूनी कार्रवाई शुरू की है कि उन लोगों ने भ्रष्ट तरीके अपना कर भारत में कारोबार के ठेके हासिल किए और इस आपराधिक कृत्य को छुपा कर उस कारोबार के लिए अमेरिकी निवेशकों से धन जुटाए।

श्री गुडेन ने कहा है कि न्याय विभाग से पूछा है कि विदेशी संस्थाओं के खिलाफ चुनिंदा तरीके से अभियोग लगाने और कार्रवाई करने क्या अमेरिका के वैश्विक गठबंधनों और आर्थिक हितों को नुकसान होने का खतरा नहीं होगा। उन्होंने यह भी पूछा है कि क्या इस तरह की कार्रवाईयों पीछे जॉर्ज सोरोस (विवादास्पद अमेरिकी निवेशक) का तो काई संबंध नहीं है।

वरिष्ठ सांसद गुडेन ने सात जनवरी के इस पत्र में कहा है कि न्याय विभाग को ऐसे मामलों और अफवाहों, जहां उसका अधिकर क्षेत्र कमजोर है या अमेरिकी हितों से जिनकी प्रासंगिकता कम है, उनका पीछा करने के बजाय अमेरिकी में रह कर अपराध और बुरे काम कर रहे लोगों पर कार्रवाई करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

सांसद ने प्रत्र में लिखा है कि ऐसी संस्थाओं को निशाना बनाना जो अरबों डॉलर का निवेश करती हैं और अमेरिकियों के लिए हजारों नौकरियां का सृजन करती हैं, लंबे समय में अमेरिका को ही नुकसान पहुंचाता है। उन्होंने लिखा है, “जब हम हिंसक अपराध, आर्थिक जासूसी और सीसीपी (चीनकी कम्यूनिस्ट पार्टी) के प्रभाव जैसे वास्तविक खतरों को नजरअंदाज करते हैं और हमारे आर्थिक विकास में योगदान करने वाले लोगों के पीछे पड़ जाते हैं इससे हमारे देश में निवेश करने के लिए आने की सोच रखने वाले नए मूल्यवान निवेशक हतोत्साहित होते हैं।”

उन्होंने लिखा है कि निवेशकों के लिए एक अवांछित और राजनीतिक प्रेरित वातावरण अमेरिकी अर्थव्यवस्था की प्रगति में बाधक होगा और निवेश को प्रोत्साहित कर के अमेरिकी अर्थव्यवस्था में नयी जान फूंकने की राष्ट्रपति ट्रम्प की प्रतिबद्धता को कमजोर करेगा।

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