शोपीस बनीं शिकायत पेटियां

ऑनलाइन जमाने की आड़ में महीनों नहीं खुलती पेटियां

जबलपुर:शासकीय विभागों में लगातार मिलती भ्रष्टाचार की शिकायतों के चलते प्रदेश शासन द्वारा समस्त शासकीय विभागों में शिकायत पेटी लगाने के निर्देश जारी किए थे। लेकिन आज के आधुनिक सोशल मीडिया के जमाने में यह शिकायत पेटियाँ मात्र शोपीस बनकर रह गई हैं। सरकारी विभागों में शिकायत पेटियाँ इसलिए लगाई गईं थीं ताकि उनमें गोपनीय शिकायतें की जा सकें। इसका उद्देश्य था कि अगर कोई शासकीय कर्मचारी या अधिकारी काम के बदले में पैसों की मांग करता है तो व्यक्ति अपनी शिकायत संबंधित विभाग के बाहर लगी शिकायत पेटी में डाल सकता है। लेकिन कलेक्ट्रेट परिसर में मौजूद जानकारो की माने तो यहां लगी शिकायत पेटी में रोजाना तीन से चार शिकायतें ही आती है। वहीं सूत्रों ने यह भी बताया कि यहां लगी पेटी को महीने में एक बार ही खोला जाता है।

बुधवार को सुनवाई
कलेक्ट्रेट कार्यालय में मौजूद अधिकारियों ने बताया कि हर मंगलवार को जिम्मेदारों द्वारा जनसुनवाई की जाती है। और बुधवार का दिन शिकायतों की सुनवाई के लिए निर्धारित किया गया है जिसमें ऐसे 25 फरियादियों को एकत्र किया जाता है और उनकी शिकायतों पर कलेक्टर द्वारा सुनवाई आमने-सामने बिठालकर की जाती है। सरकारी विभागो के बड़े अफसरों के पास वैसे तो शिकायतें सार्वजनिक रूप से की जाती हैं। फरियादी खुद उपस्थित होकर लिखित शिकायत कर जाँच की माँग करते हैं।

नहीं मिलती पावती
विभागों में लगी शिकायत पेटियों पर पड़ताल करते हुए जब नवभारत संभागायुक्त कार्यालय पहुंच तो वहां मौजूद शिकायत सुनने वाले अधिकारियों द्वारा बताया गया कि ऑनलाइन के जमाने में कोई भी लिखित शिकायतें पेटियों में नहीं डाल रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि शिकायत पेटियों में शिकायतें डालने पर फरियादियों को पावती भी नहीं मिलती है। वैसे तो शिकायतों पर लोकायुक्त ईओडब्ल्यू जैसी एजेंसियां हर साल सरकारी कर्मचारियों को ट्रैप करती है। इस साल भी भ्रष्ट सरकारी अधिकारियों को रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा गया। कार्यवाही के तौर पर कर्मचारी को सस्पेंड कर दिया जाता है। लेकिन सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार नहीं रुक रहा है। विभागों में पेटियाँ भी लगी हुई हैं जिनमें लिखा है भ्रष्टाचार की शिकायत लिखकर डालें। ऑनलाइन और सोशल मीडिया के युग में भी रोजाना इन पेटियों को खुलना चाहिए। बाकी जंग लगे ताले सारी हकीकत बयां कर रहे हैं।

इनका कहना है
मैं इस पर पूरी जानकारी इकट्ठा करके आपसे चर्चा कर पाऊंगी।
दिव्या अवस्थी, संयुक्त आयुक्त, संभागायुक्त कार्यालय

शिकायत मिलने पर शिकायतकर्ता के समक्ष ही कार्रवाई की जाती है। बुधवार का दिन इसके लिए निर्धारित किया गया है। कलेक्टर सर खुद ही इसकी सुनवाई करवाते हैं।
नाथूराम गोड, सहायक कलेक्टर, जबलपुर

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