नयी दिल्ली, (वार्ता) भारत वस्त्र और परिधानों के वैश्विक व्यापार में 3.9 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ दुनिया का छठा सबसे बड़ा निर्यातक है।
वस्त्र मंत्रालय के एक विश्लेषण के अनुसार देश के कुल निर्यात कारोबार में हस्तशिल्प सहित वस्त्र और परिधान (टीऔरए) क्षेत्र की हिस्सेदारी वर्ष 2023-24 में 8.21 प्रतिशत रही। विश्लेषण के अनुसार वस्त्र और परिधानों के वैश्विक व्यापार में भारत की हिस्सेदारी 3.9 प्रतिशत है।
भारत वस्त्र और परिधान के वैश्विक बाजारों में अमेरिका और यूरोपीय संघ का प्रमुख स्थान है। देश के कुल वस्त्र और परिधान निर्यात का लगभग 47 प्रतिशत हिस्सा इन दोनों बाजारों में जाता है।
चालू वित्त वर्ष 2024-25 में अप्रैल-अक्टूबर के दौरान में कुल वस्त्र एवं परिधान निर्यात करीब 20.31 अरब डॉलर के बराबर रहा जो सालाना आधार पर छह प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। इसमें इसी अवधि के 105 करोड़ डालर के हस्तशिल्प निर्यात को मिला दें तो इस अविध के दौरान हस्तशिल्प सहित कुल वस्त्र और परिधानों का निर्यात 21.36 अरब डॉलर के साथ सात प्रतिशत बढ़ा।
भारत में वस्त्र और परिधानों के क्षेत्र में आयातक भी है। विश्लेषण के अनुसार आयात का बड़ा हिस्सा पुनः निर्यात या कच्चे माल की उद्योग आवश्यकता की पूर्ति के लिए होता है।
विश्लेषण में कहा गया है कि भारत के वस्त्र और परिधान क्षेत्र का निर्यात कई भू-राजनीतिक स्थितियों (जैसे लाल सागर संकट, बांग्लादेश संकट आदि) से भी प्रभावित हुआ है। वित्त वर्ष 2023-24 में मुख्य रूप से लाल सागर के आसपास भू-राजनीतिक संकटों के कारण निर्यात शुरू में कम रहा। इस कारण वर्ष 2024 के पहले तीन माह (जनवरी, फरवरी और मार्च) के दौरान निर्यात पर प्रभाव पड़ा।
भारत में वित्त वर्ष 2023-24 में 894.6 करोड़ डॉलर वस्त्र और परिधान उत्पादों का आयात हुआ 2022-23 के 1048 करोड़ डालर के आयात की तुलना में लगभग 15 प्रतिशत कम है।
चालू वित्त वर्ष 2024-25 की अप्रैल-अक्टूबर की अवधि में कपड़ा और परिधान आयात (हस्तशिल्प सहित) 542.5 करोड़ डॉलर रहा। यह वर्ष 2023-24 की इसी अवधि के 546.4 करोड़ डॉलर की तुलना में एक प्रतिशत कम है।
चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-अक्टूबर अवधि में वस्त्र एवं परिधान उत्पादों के कुल आयात में 185.9 करोड़ डॉलर का आयात के साथ मानव निर्मित वस्त्रों का हिस्सा (34 प्रतिशत) सबसे बड़ा रहा। यद्यपि इस श्रेणी का आयात इस दौरान सालाना आधार पर 13 प्रतिशत कम रहा। पिछले साल इसी दौरान आयात 212.7 करोड़ डॉलर के बराबर था।
इस वर्ष अप्रैल-अक्टूबर अवधि में हस्तशिल्प सहित वस्त्र एवं परिधानों के आयात में वृद्धि मुख्य रूप से सूती वस्त्रों के आयात में 13 प्रतिशत उछाल के चलते देखी गई है। इस श्रेणी में लंबे रेशे वाले कपास फाइबर के आयात में वृद्धि का योगदान प्रमुख है।
मंत्रालय का कहना है कि आयात की ऐसी प्रवृत्ति बढ़ती खपत और आत्मनिर्भरता के बीच देश में उत्पादन क्षमता में वृद्धि की ओर संकेत करती है।