
छतरपुर। छतरपुर स्थित महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में लगातार सामने आ रही वित्तीय अनियमितताओं, कुप्रबंधन और प्रशासनिक गड़बड़ियों की शिकायतों के बाद अंततः राज्य शासन ने कड़ा कदम उठाते हुए विश्वविद्यालय में धारा 52 लागू कर दी है। शासन द्वारा जारी आदेश के साथ ही विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद भंग कर दी गई है और वर्तमान कुलपति प्रो. शुभा तिवारी के सभी प्रशासनिक एवं वित्तीय अधिकार शासन ने अपने अधीन ले लिए हैं। अब विश्वविद्यालय का संचालन सीधे राज्य शासन के नियंत्रण में रहेगा।
धारा 52 उस स्थिति में लागू की जाती है जब किसी विश्वविद्यालय में परिस्थितियाँ सामान्य रूप से नहीं चल रहीं हों और शासन को यह महसूस हो कि संस्थान में तत्काल हस्तक्षेप की आवश्यकता है। इस धारा के लागू होने के बाद अब कुलपति शुभा तिवारी किसी भी प्रशासनिक अधिकार का उपयोग नहीं कर सकेंगी। बताया जा रहा है कि विश्वविद्यालय में नियुक्तियों, वित्तीय क्रियाकलापों, संबद्ध महाविद्यालयों के परीक्षा परिणामों और अन्य कार्यों से संबंधित कई शिकायतें लगातार शासन तक पहुँच रही थीं। इन शिकायतों की विभागीय जाँच के बाद यह बड़ा निर्णय लिया गया है।
कुलपति शुभा तिवारी इससे पहले भी विवादों में रह चुकी हैं। कुछ माह पूर्व सीता माता पर की गई टिप्पणी को लेकर वे चर्चा में आई थीं और इस बयान के चलते भी विश्वविद्यालय की छवि पर सवाल उठे थे। वहीं, विश्वविद्यालय में की गई नियुक्तियों और प्रशासनिक निर्णयों पर भी अनियमितता के आरोप लगाए जाते रहे हैं, जिन्हें लेकर कई बार विरोध सामने आया।
इनका कहना है कि
धारा 52 लागू होने के साथ ही कार्यपरिषद स्वतः भंग हो गई है और अब इसके पुनर्गठन की प्रक्रिया राज्य शासन की निगरानी में होगी। इस संबंध में शासन ने नया आदेश जारी कर दिया है। विश्वविद्यालय के कुलसचिव यशवंत पटेल ने शासन के निर्देशों की पुष्टि की है और बताया कि आगे के सभी कार्य शासन के निर्देशानुसार संचालित होंगे।
