भोपाल: दिवाली पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि शुभ मुहूर्त और विधि-विधान से पूजा करने पर मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। इस बार दिवाली पर लक्ष्मी पूजन का पहला मुहूर्त शाम 5 बजकर 21 मिनट से शुरू होकर रात 10 बजकर 26 मिनट तक रहेगा। हालांकि, पंडितों के अनुसार लक्ष्मी पूजन के लिए स्थिर लग्न का विशेष महत्व है। मान्यता है कि स्थिर लग्न में पूजा करने से मां लक्ष्मी घर में स्थायी रूप से विराजमान होती हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं।
दिवाली की पारंपरिक पूजा में कई तरह की पूजन सामग्रियों का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें हल्दी, कुमकुम, अक्षत, चंदन, चावल, रोली, अबीर और गुलाल का विशेष महत्व बताया गया है। पूजा के दौरान इन सामग्रियों से मां लक्ष्मी का पूजन किया जाता है। इसके बाद उन्हें नए वस्त्र अर्पित किए जाते हैं और नैवेद्य का भोग लगाया जाता है।
मां लक्ष्मी को भोग के रूप में मिश्री, मालपुए, पेठे और दूध से बनी विभिन्न मिठाइयां अर्पित की जा सकती हैं। वहीं, फूलों में कमल का पुष्प और लाल रंग के फूल मां लक्ष्मी को अत्यंत प्रिय माने जाते हैं। मान्यता है कि कमल का फूल अर्पित करने से सुख, सौभाग्य और धन-संपदा का आशीर्वाद मिलता है।
दिवाली पर लक्ष्मी पूजन के शुभ मुहूर्त से लेकर स्थिर लग्न का महत्व, पारंपरिक पूजा विधि और मां लक्ष्मी को चढ़ाए जाने वाले फूलों एवं भोग तक की जानकारी के लिए हमने पंडित पारश शर्मा से खास बातचीत की।
