जबलपुर: मप्र हाईकोर्ट ने पदोन्नति देकर कंपनी कमांडर बनाए जाने के बाद वापस प्लाटून कमांडर के पद पर पदावनत करने के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ ने बैतूल होमगार्ड कार्यालय में पदस्थ सुनीता पांडारे की याचिका पर सुनवाई करते हुए दो नवंबर 2026 के आदेश का क्रियान्वयन उनके संबंध में अगली सुनवाई तक स्थगित कर दिया।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विकास महावर ने पक्ष रखते हुए दलील दी कि 13 जुलाई 2026 को 71 प्लाटून कमांडरों को कंपनी कमांडर के पद पर पदोन्नत किया गया था। विभागीय पदोन्नति समिति ने आरक्षण और अन्य पात्रताओं के आधार पर याचिकाकर्ता को भी पदोन्नति के लिए पात्र पाते हुए अनुशंसा की थी। इसके आधार पर उन्हें नियमित और बिना शर्त पदोन्नति दी गई थी। दलील दी गई कि एक सामान्य वर्ग की महिला अधिकारी के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण लंबित होने के कारण विभागीय पदोन्नति समिति ने उनका मामला सीलबंद लिफाफे में रखा था।
बाद में प्रकरण समाप्त होने पर लिफाफा खोलकर उन्हें पदोन्नति दे दी गई। इसके बाद महानिदेशक होमगार्ड ने याचिकाकर्ता को कंपनी कमांडर से वापस प्लाटून कमांडर के पद पर पदावनत कर दिया। याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि यह आदेश पारित करने से पहले उन्हें सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया। साथ ही पदोन्नति में आरक्षण और रोस्टर के प्रावधानों का पालन भी नहीं किया गया। अनुसूचित जनजाति वर्ग की अधिकारी को निचले पद पर भेजकर सामान्य वर्ग की महिला अधिकारी को पदोन्नति देना नियमसम्मत नहीं है। विस्तृत सुनवाई के बाद एकलपीठ ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। साथ ही विवादित आदेश के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगा दी गई।
