जबलपुर । हाईकोर्ट ने शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय एवं चिकित्सालय, गौरीघाट में कार्यरत चार दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को राहत देते हुए उनके विरुद्ध जारी विवादित आदेश निरस्त कर दिए हैं। न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह की एकलपीठ ने यह आदेश पारित किया। याचिकाकर्ता गीता बाई, सतीश नायर, भूपेन्द्र सिंह ठाकुर और उषा गुप्ता की ओर से अधिवक्ता कृष्णकुमार व सिद्धार्थ पांडे ने पैरवी की।
उन्होंने दलील दी कि कर्मचारी लंबे समय से निरंतर सेवाएं दे रहे हैं और शासन की सात अक्टूबर 2016 की योजना के तहत स्थायी कर्मी का दर्जा व वेतनमान पाने के पात्र हैं। अधिवक्ताओं ने युगलपीठ के 27 जनवरी 2026 के बिहारीलाल रजक विरुद्ध मध्यप्रदेश शासन वाले फैसले का हवाला दिया। शासन की ओर से भी स्वीकार किया गया कि वर्तमान प्रकरण उक्त निर्णय से कवर है। कोर्ट ने पूर्व निर्णय की व्यवस्था को चारों कर्मचारियों पर लागू करते हुए 27 मार्च 2025 के विवादित आदेश सहित संबंधित आदेश निरस्त कर दिए।
