सीधी: शहर के ऐतिहासिक सोनांचल बस स्टैंड से बसों का संचालन दोबारा शुरू कराने की मांग को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। अब यह पूरा मामला नगरपालिका परिषद सीधी की प्रेसिडेंट इन काउंसिल (पीआईसी) के पाले में है। ‘सोनांचल बस स्टैंड बचाओ-व्यापार बचाओ संघर्ष समिति’ द्वारा जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपने के बाद प्रशासन ने गेंद नगरपालिका के पाले में डाल दी है, जिसके बाद अब पीआईसी मेंबर्स के हाथों ही इसका भविष्य तय होना है।यहां बताते चलें कि शहरवासियों और सोनांचल बस स्टैण्ड बचाओ -व्यापार बचाओ संघर्ष समिति का कहना है कि सोनांचल बस स्टैण्ड से बसों के संचालन से जाम का तर्क फीका पड़ रहा है क्योंकि शहर के अन्दर से आज भी बसें दौड़ रही हैं।
इस पूरे विवाद में अब एक नया और बेहद महत्वपूर्ण पहलू सामने आया है। दरअसल, सोनांचल बस स्टैंड से बसों का संचालन बंद करने के पीछे मुख्य उद्देश्य यह बताया गया था कि शहर के अंदर यात्री बसों के आने-जाने से भारी जाम की स्थिति बनती है। लेकिन ज़मीनी हकीकत इसके उलट है। स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों का कहना है कि सोनांचल बस स्टैंड बंद होने के बाद भी शहर के अंदर पुराने बस स्टैंड के ठीक बगल से कुसमी, टिकरी, निगरी, निवास, टमसार और मड़वास की बसें लगातार आ-जा रही हैं।
इतना ही नहीं, शहर के मुख्य मार्गों जैसे— संजय गांधी कॉलेज रोड, कलेक्ट्रेट चौराहा, अस्पताल चौराहा और सम्राट चौराहे से होते हुए सिंगरौली के अलावा पटपरा, कमर्जी, मऊगंज, प्रयागराज, बनारस, सिहावल और अमिलिया की ओर जाने वाली बसें आज भी शान से गुजर रही हैं। ऐसे में लोगों का तर्क है कि जब आधी से ज्यादा बसें अब भी शहर के मुख्य चौराहों से होकर गुजर रही हैं, तो केवल सोनांचल बस स्टैंड से बसों का संचालन बंद कराना पूरी तरह से औचित्यहीन और समझ से परे है।
पीआईसी सदस्यों ने भी उठाया यही तर्क, नपाध्यक्ष का रुख सकारात्मक
नगरपालिका सीधी के पीआईसी सदस्य पार्षदों का भी यही मानना है कि जब शहर के मुख्य चौराहों से बसों का आवागमन बंद ही नहीं हुआ, तो पुराने बस स्टैंड को उजाड़ने का कोई ठोस आधार नहीं बचता।
वर्तमान में पीआईसी सदस्यों का मत भले ही पूरी तरह खुलकर सामने न आया हो, लेकिन नगरपालिका अध्यक्ष काजल वर्मा पूरी तरह से फुटपाथ व्यापारियों के पक्ष में नजर आ रही हैं। उन्होंने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि सोनांचल बस स्टैंड का पुनः संचालन छोटे व्यापारियों के हित में है और इस विषय का प्रस्ताव वे पीआईसी में रखेंगी।
कांग्रेस परिषद के सामने अपने ही फैसले को बदलने की चुनौती
सीधी नगरपालिका में इस समय कांग्रेस की परिषद है। एक निर्दलीय पार्षद को छोड़ दें तो पीआईसी के सभी मेंबर्स कांग्रेसी ही हैं। पूर्व में इसी पीआईसी की बैठक में प्रस्ताव पास हुआ था कि पुराने बस स्टैंड को हटाकर वहां शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बनाया जाए। अब संघर्ष समिति और जनभावनाओं के दबाव के बाद अपनी ही परिषद के पुराने निर्णय को पलटना और सोनांचल बस स्टैंड को पुनर्जीवित करने का नया प्रस्ताव पारित करना कांग्रेस के पार्षदों के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। अब देखना होगा कि आगामी बैठक में इस पर क्या अंतिम मुहर लगती है।
इनका कहना है
पूर्व की बैठक में शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बनाने का निर्णय शहर के आधुनिकीकरण को ध्यान में रखकर लिया गया था। लेकिन वर्तमान में व्यापारियों की जो स्थिति बनी है और आम जनता को जो आवागमन में परेशानी हो रही है, उसे भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। शहर में बसों के रूट और जाम की स्थिति की हम नए सिरे से समीक्षा कर रहे हैं। पीआईसी की आगामी बैठक में सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद ही ऐसा निर्णय लिया जाएगा जिससे परिषद की साख भी बची रहे और जनता का अहित भी न हो।
आनंद बहादुर सिंह
वरिष्ठ पार्षद, पीआईसी सदस्य नपा सीधी
संघर्ष समिति और जिला प्रशासन की ओर से जो बातें और ज्ञापन नगरपालिका के पास आए हैं, वे बेहद गंभीर हैं। चूंकि मामला अब पीआईसी के समक्ष आना है, इसलिए हम सभी सदस्य आपस में और पार्टी नेतृत्व के साथ इस पर चर्चा कर रहे हैं। शहर के अंदर से बसों के संचालन का जो तर्क दिया जा रहा है, वह तकनीकी रूप से सही है। पीआईसी की बैठक में इस पर विस्तृत एजेंडा रखकर लोकतांत्रिक तरीके से अंतिम फैसला लिया जाएगा।
विनोद मिश्रा
वरिष्ठ पार्षद, पीआईसी सदस्य नपा सीधी
शहर का विकास जरूरी है, लेकिन किसी गरीब की रोजी-रोटी छीनकर या जनता को परेशान करके विकास नहीं किया जा सकता। जब शहर के अन्य मुख्य मार्गों और चौराहों से आज भी कुसमी, मड़वास, सिंगरौली और प्रयागराज की बसें गुजर रही हैं, तो केवल सोनांचल बस स्टैंड को बंद रखना पूरी तरह औचित्यहीन है। इससे जाम की समस्या का हल नहीं हुआ, बल्कि छोटे व्यापारी बर्बाद हो गए। हम पीआईसी की बैठक में पूरी ताकत से बस स्टैंड को पुनः चालू करने के प्रस्ताव का समर्थन करेंगे।”
रजनीश श्रीवास्तव
पार्षद,पीआईसी सदस्य नपा सीधी
