
छिंदवाड़ा। जिला अस्पताल के गायनिक वार्ड में प्रसव व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। बुधवार को प्रसव के बाद एक नवजात की मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों ने डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है। परिजनों का दावा है कि पिछले एक महीने में गायनिक वार्ड में तीन से चार नवजातों की मौत हो चुकी है। लगातार सामने आ रहे मामलों से अस्पताल की प्रसव व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। जानकारी के अनुसार, राजपूत परिवार की गर्भवती महिला को प्रसव के लिए जिला अस्पताल के गायनिक वार्ड में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि वे तीन दिन से महिला का सीजर कराने की मांग कर रहे थे, लेकिन डॉक्टरों ने उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया। बुधवार को महिला को प्रसव पीड़ा होने पर स्टाफ को सूचना दी गई। परिजनों के मुताबिक, उस समय वार्ड में डॉक्टर मौजूद नहीं थे। इसके बाद स्टाफ महिला को ऑपरेशन थिएटर ले गया, जहां सामान्य प्रसव कराया गया। परिजनों का आरोप है कि प्रसव के दौरान महिला के पेट पर दबाव बनाया गया। इस दौरान महिला की बच्चेदानी फट गई और प्रसव के कुछ समय बाद नवजात की मौत हो गई। महिला की हालत गंभीर होने पर उसे नागपुर रेफर कर दिया गया, जहां परिजन उसे उपचार के लिए लेकर गए हैं। परिवार का आरोप है कि समय रहते सीजर किया जाता तो शायद यह स्थिति नहीं बनती। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
वीडियो बनाने के बाद किया महिला का सीजर०००००
इसी वार्ड में सद्भावना सलामी नाम की एक अन्य गर्भवती महिला को भी भर्ती कराया गया था। परिजनों के अनुसार, डॉक्टरों ने प्रसव के लिए एक सप्ताह का समय बताया था, जबकि महिला दर्द से परेशान थी। इसी दौरान समाजसेवी दयानंद चौरसिया ने परिजनों से चर्चा कर अस्पताल की व्यवस्था को लेकर वीडियो बनाया और डॉक्टरों की जवाबदेही का मुद्दा उठाया। परिजनों का कहना है कि इसके बाद महिला का सीजर किया गया। इस घटनाक्रम ने भी अस्पताल की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
जांच के बाद होगी कार्रवाई ००००
जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अर्चना कैथवास ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है। पीडि़त परिजनों का पक्ष सुनने के साथ संबंधित डॉक्टरों और स्टाफ से भी जानकारी ली जाएगी। दोनों पक्षों को सुनने और मामले की जांच के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
