
विदिशा, शहरवासियों को सुविधाएं देने के बदले में नगर पालिका जनता से टेक्स लेती है यह क्रम चलता रहता है. लेकिन जो टेक्स की बसूली होना चाहिए थी वह नहीं हो पा रही है. नगर पालिका की राजस्व वसूली के आंकड़े उसकी आर्थिक स्थिति पर सवाल खड़े कर रहे हैं. पिछले तीन वित्तीय वर्षों में नगर पालिका की राजस्व वसूली 20 प्रतिशत के आंकड़े को भी पार नहीं कर सकी. स्थिति यह है कि निर्धारित राजस्व का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा अब भी बकाया है. ऐसे में शहर की व्यवस्थाओं के संचालन और नागरिक सुविधाओं के विस्तार के लिए पर्याप्त संसाधन जुटाना नगर पालिका के सामने बड़ी चुनौती बना हुआ है.
हर महीने करीब 4 करोड़ रुपये खर्च
नगर पालिका में कर्मचारियों के वेतन से लेकर पेयजल आपूर्ति, बिजली, डीजल और अन्य व्यवस्थाओं पर हर महीने बड़ी राशि खर्च हो रही है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, करीब 1300 कर्मचारियों के वेतन पर 2 करोड़ 20 लाख रुपये प्रतिमाह खर्च किए जा रहे हैं. जल आपूर्ति व्यवस्था पर लगभग 40 लाख रुपये और बिजली बिल एवं डीजल पर करीब 80 लाख रुपये खर्च होते हैं. इसके अलावा सफाई सामग्री, कर्मचारियों की ड्रेस, जूते, मोटरों की मरम्मत और अन्य रखरखाव पर भी राशि खर्च करनी पड़ती है. बिजली बिल की राशि घटाने के बाद नगर पालिका को करीब डेढ़ करोड़ रुपये की आय प्राप्त होती है. इसके अतिरिक्त राजस्व वसूली से हर महीने 30 से 40 लाख रुपये मिलने की जानकारी दी गई है. तीन साल से लक्ष्य से काफी पीछे वसूली
नगर पालिका की राजस्व वसूली के आंकड़े लगातार कमजोर स्थिति दर्शा रहे हैं.
वित्तीय वर्ष
राजस्व वसूली
बकाया राजस्व
2023-24
16.24 प्रतिशत
83.76 प्रतिशत
2024-25
19.32 प्रतिशत
80.68 प्रतिशत
2025-26
15.48 प्रतिशत
84.52 प्रतिशत
आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024-25 में राजस्व वसूली 19.32 प्रतिशत तक पहुंची थी, लेकिन अगले वित्तीय वर्ष में यह घटकर 15.48 प्रतिशत रह गई. यानी तीन वर्षों में वसूली 20 प्रतिशत तक नहीं पहुंच सकी और वर्ष 2025-26 में बकाया राशि का अनुपात बढक़र 84.52 प्रतिशत हो गया. सबसे बड़ा सवाल यह है कि निर्धारित राजस्व लक्ष्य हासिल करने के लिए क्या प्रभावी वसूली अभियान चलाए जा रहे हैं? बड़े बकायादारों से राशि वसूलने के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए हैं और वसूली में लगातार पिछडऩे की जिम्मेदारी किसकी तय की जा रही है? नगर पालिका को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए जरूरी है कि राजस्व वसूली की नियमित समीक्षा हो, बकायादारों से वसूली के लिए समयबद्ध कार्ययोजना बनाई जाए और नागरिकों को मिलने वाली सुविधाओं के साथ आय-व्यय का विवरण भी पारदर्शी रखा जाए.
इनका कहना
सीएमओ दुर्गेश सिंह ने कहा कि राजस्व वसूली के लिए मार्च तक का समय शेष है. इस अवधि में बेहतर वसूली के प्रयास किए जाएंगे. उन्होंने बताया कि मंदिरों, धर्मशालाओं, शासकीय भवनों और पुरानी फैक्ट्री का गलत टैक्स भी रिकॉर्ड में जुड़ा हुआ है, जिसे पोर्टल पर दुरुस्त किया जाना है. इन प्रविष्टियों को ठीक करने के बाद राजस्व वसूली की स्थिति में सुधार होने की उम्मीद है.
