हाई कोर्ट ने कोविड के दौरान मान्यता प्राप्त पत्रकार के परिजन के निजी अस्पताल के इलाज खर्च की प्रतिपूर्ति का आदेश दिया

नयी दिल्ली, 4 नवंबर (वार्ता) दिल्ली उच्च न्यायालय ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में कोविड-19 महामारी के दौरान दिल्ली के सरकारी अस्पतालों को कोविड अस्पताल घोषित किए जाने के कारण एक सामान्य मरीज को आपात स्थिति में निजी अस्पताल में उपचार कराने के चिकित्सा खर्च की प्रतिपूर्ति करने को कहा है।

न्यायमूर्ति अमित महाजन की पीठ ने रिट याचिका (सी) 4563/2026 रविंदर गुप्ता बनाम स्वास्थ्य सेवाओं के निदेशक, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार मामले में यह फ़ैसला सुनाया है। याचिकाकर्ता रविंदर गुप्ता, दिल्ली सरकार से मान्यता-प्राप्त पत्रकार हैं। उन्होंने अपनी पत्नी के उपचार पर सर गंगा राम अस्पताल और सर गंगा राम सिटी अस्पताल में खर्च हुई 11,83,105 रुपये की शेष राशि की प्रतिपूर्ति की मांग की थी।

याचिकाकर्ता गुप्ता ने दिल्ली प्रेस रिपोर्टर एवं चिकित्सा सहायता नियम, 1955 के तहत चिकित्सा प्रतिपूर्ति का दावा किया था। दिल्ली सरकार की 15 नवंबर 2011 की अधिसूचना के नियम 7 में आपातकालीन परिस्थितियों में मान्यता-प्राप्त पत्रकारों और उनके परिवार के सदस्यों को सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में उपचार कराने की अनुमति का प्रावधान है। हालांकि, स्वास्थ्य सेवाओं के निदेशक ने 21 जुलाई 2025 के पत्र के माध्यम से यह कहते हुए प्रतिपूर्ति से इनकार कर दिया था कि मरीज की शल्य चिकित्सा आपातकालीन प्रकृति की नहीं थी।

न्यायमूर्ति अमित महाजन ने मामले के तथ्यों और अस्पताल द्वारा जारी आपातकालीन प्रमाणपत्र का परीक्षण करते हुए पाया कि मरीज को तत्काल भर्ती और उपचार की सलाह दी गई थी। जीबी पंत अस्पताल का रेफरल तथा सर गंगा राम अस्पताल का आपातकालीन प्रमाणपत्र इस बात की पुष्टि करते हैं कि उपचार की आवश्यकता आपात परिस्थितियों में उत्पन्न हुई थी। अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि प्रतिवादी पक्ष अस्पताल के आपातकालीन प्रमाणपत्र का खंडन करने में विफल रहा।

सरकार की ओर से दलील दी गई कि नियम 7 के प्रावधान के तहत प्रतिपूर्ति का लाभ तभी दिया जा सकता है, जब सरकारी अस्पतालों में हड़ताल हो। केवल अस्पताल को कोविड अस्पताल घोषित किए जाने को हड़ताल के समान नहीं माना जा सकता। हालांकि, न्यायालय ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।

याचिकाकर्ता गुप्ता के अनुसार, 4 अगस्त 2021 को उनकी पत्नी को जीबी पंत अस्पताल में जाँच के बाद सर गंगा राम अस्पताल रेफर किया गया था, क्योंकि सरकारी अस्पताल में आवश्यक शल्य चिकित्सा की सुविधा उपलब्ध नहीं थी। उस समय कोविड-19 महामारी के कारण कई सरकारी अस्पतालों को कोविड अस्पताल घोषित किया गया था, जिससे सामान्य मरीजों के उपचार की उपलब्धता प्रभावित हुई थी।

 

 

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