सामूहिक दुष्कर्म के पांच आरोपियों को आजीवन कारावास

शुजालपुर, नाबालिग को अगवा कर सामूहिक दुष्कर्म करने और बाद में अलग-अलग स्थानों पर उसका यौन शोषण करने के मामले में विशेष पॉक्सो न्यायालय ने पांच आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. इनमें एक महिला आरोपी भी शामिल है. न्यायालय ने सभी आरोपियों को विभिन्न धाराओं में कारावास और अर्थदंड से भी दंडित किया है.

जिला अभियोजन के मीडिया प्रभारी प्रतीक श्रीवास्तव ने बताया कि विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट ने आरोपी मयंक उर्फ गोलू विश्वकर्मा, शाहदत उर्फ राजा, अनस उर्फ अनीस खां, दुर्गेश राठौर और सुनीता राठौर को दोषी पाया. तीन आरोपियों को धारा 70(2) बीएनएस और अन्य संबंधित धाराओं में आजीवन कारावास, दुर्गेश को धारा 64(2) एम बीएनएस तथा सुनीता को संबंधित धाराओं में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई. अन्य धाराओं में भी अलग-अलग अवधि के कारावास और अर्थदंड लगाए गए. अभियोजन के अनुसार 26 जून 2025 को पीडि़ता के पिता ने शुजालपुर मंडी थाने में उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी. पुलिस ने 30 जून को पीडि़ता को दस्तयाब किया. पीडि़ता ने बताया कि 25 जून की रात घर से निकलकर जाते समय मयंक और राजा उसे पिकअप में बैठाकर ले गए. बाद में अनस को बुलाकर उसे ऑटो रिक्शा से मेवाड़ा ढाबे ले जाया गया, जहां तलघर में तीनों आरोपियों ने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया. इसके बाद आरोपी उसे शाजापुर में मयंक की मौसी सुनीता राठौर के पास ले गए. सुनीता ने अपने बेटे दुर्गेश की शादी कराने के लिए पीडि़ता को रखने में सहयोग किया. दुर्गेश ने भी दो दिन तक उसके साथ दुष्कर्म किया. बाद में पीडि़ता को अकोदिया और फि र इंदौर ले जाया गया, जहां मयंक और दुर्गेश ने उसके साथ दोबारा दुष्कर्म किया. इसके बाद उसे बस में बैठाकर भेज दिया गया. अकोदिया पहुंचने पर पुलिस ने उसे दस्तयाब किया.

डीएनए मिलान बना अहम साक्ष्य…

पुलिस ने विवेचना के बाद न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया. मेडिकल परीक्षण के बाद जब्त प्रदर्शों से आरोपियों के डीएनए का मिलान मामले में महत्वपूर्ण साक्ष्य रहा. न्यायालय ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि सामूहिक दुष्कर्म की साझा मंशा से सहयोग करने वाली महिला को भी अपराध के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है, भले ही वह स्वयं शारीरिक रूप से अपराध में शामिल न हुई हो. प्रकरण में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक रमेश सोलंकी और प्रदीप कुमार भटेले ने पैरवी की. अभियोजन के साक्ष्यों और तर्कों से सहमत होकर न्यायालय ने दोषसिद्धि का निर्णय सुनाया.

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