
ग्वालियर। सिद्धपीठ श्री गंगादास की बड़ी शाला, लक्ष्मीबाई कॉलोनी में अखंड नाम-संकीर्तन और राम-नाम लेखन का आध्यात्मिक अभियान निरंतर चल रहा है। श्री पूर्ण वैराठी पीठाधीश्वर स्वामी रामसेवक दास महाराज के सानिध्य में कोरोना काल में प्रारंभ हुआ यह अभियान सात वर्ष की साधना पूर्ण कर चुका है। इसके अंतर्गत स्थापित ‘श्री नाम नारायण भगवान बैंक’ में अब तक भक्तों द्वारा लिखे गए 15 लाख राम-नाम संचित किए जा चुके हैं। अब संतों और भक्तों ने वर्ष 2027 तक एक करोड़ राम-नाम संचित करने का संकल्प लिया है।
कार्तिक मास पर सिद्धपीठ में आयोजित आध्यात्मिक समागम में देश के विभिन्न क्षेत्रों से संत-महात्मा और रामभक्त पहुंचे। स्वामी रामसेवक दास महाराज के सानिध्य में संतों ने लगभग छह लाख राम-नाम लिखी कॉपियां भगवान श्रीराम के चरणों में समर्पित कीं। इस अवसर पर भगवन्नाम की महिमा और नाम-स्मरण की महत्ता पर प्रकाश डाला गया।
सिद्धपीठ की ओर से धर्मप्रेमियों, युवाओं और माताओं-बहनों से प्रतिदिन कुछ समय राम-नाम लेखन के लिए निकालने तथा वर्ष 2027 तक एक करोड़ राम-नाम संचित करने के महाअभियान में सहभागी बनने का आह्वान किया गया है।
