
ग्वालियर। श्री सनातन धर्म मंदिर में श्रीराम जी महिला भक्त मंडल के तत्वावधान में आयोजित नौ दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा ज्ञान यज्ञ का विश्राम प्रभु श्रीराम के राज्याभिषेक के भावपूर्ण प्रसंग के साथ हुआ। कथा व्यास संत श्यामसुंदर दास महाराज ने लक्ष्मण-मेघनाद युद्ध, कुंभकर्ण वध, रावण वध, भरत मिलाप, प्रभु श्रीराम के अयोध्या आगमन तथा राज्याभिषेक के प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया.
राम-रावण के बीच हुए भीषण युद्ध का वर्णन करते हुए महाराजश्री ने बताया कि अंततः प्रभु श्रीराम के बाण से रावण का अंत हुआ। रावण विद्वान और शक्तिशाली होने के साथ शिवभक्त भी था, लेकिन अहंकार और अधर्म ने उसके समस्त गुणों को निष्फल कर दिया। ज्ञान और सामर्थ्य तभी सार्थक हैं, जब उनके साथ विनम्रता, विवेक और धर्माचरण जुड़ा हो।
महाराजश्री ने बताया कि प्रभु श्रीराम के वनवास के चौदह वर्ष पूर्ण होने पर नंदीग्राम में भरत जी अपने आराध्य और बड़े भाई के आगमन की बेसब्री से प्रतीक्षा कर रहे थे।प्रभु श्रीराम के नंदीग्राम पहुंचने पर भरत जी से उनका मिलन अत्यंत भावपूर्ण रहा। दोनों भाइयों का प्रेम, त्याग और समर्पण सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
कथा व्यास ने इस प्रसंग का आध्यात्मिक अर्थ बताते हुए कहा कि भरत जी का चरित्र सिखाता है कि सच्चा प्रेम अधिकार नहीं, त्याग और समर्पण मांगता है।
कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से सभी प्रसंगों का श्रवण किया। मुख्य यजमान विनोद बांदिल एवं सरस्वती देवी बांदिल, नरेंद्र सिंघल, सौरभ सिंघल राधेश्याम मंगल आदि ने रामायण जी की आरती की। श्रीराम जी महिला भक्त मंडल द्वारा आयोजित नौ दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा ज्ञान यज्ञ का समापन प्रभु श्रीराम के जयकारों और भक्तिमय वातावरण में हुआ।
