नयी दिल्ली, 29 अक्टूबर (वार्ता) केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने देश के औद्योगिक परिदृश्य की कायाकल्प के लिए उत्पाद की गुणवत्ता, बड़े पैमाने पर उत्पादन, वैश्विक बाजारों तक पहुँच और समावेशिता के आधार पर आगे बढ़ने की रणनीति की आवश्यकता बताया। उन्होंने कहा कि नवाचार के लिए सरकार, निजी क्षेत्र और शिक्षा जगत के बीच सहयोग को बढ़ावा मिलना चाहिए। यहां इंस्टिट्यूट ऑफ स्टडीज ने इंडस्ट्रियल डेवलमपेंट (आईएसआईडी) और इंडिया डाटा रिसर्च अकादमी (आईडीआरए) द्वारा आयोजित देश के औद्योगिक रूपांतरण पर चौथे राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए वाणिज्य मंत्री ने कहा कि भारत को विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त विनिर्माण राष्ट्र बनने का लक्ष्य रखना चाहिए।
श्री गोयल ने गुणवत्ता, वैश्विक बाजारों तक पहुँच, बड़े पैमाने पर उत्पादन और समावेशिता को चार प्रमुख विशेषताओं के रूप में रेखांकित किया, जो देश के औद्योगिक परिदृश्य के रूपांतरण को गति दे सकती हैं। उन्होंने कहा कि गुणवत्ता सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “शून्य दोष, शून्य प्रभाव” के सिद्धांत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मुक्त व्यापार समझौतों के माध्यम से दुनिया भर के बाजारों के खुलने के साथ भारत को बाजार हिस्सेदारी हासिल करने, वैश्विक उपस्थिति बढ़ाने और तरजीही बाजार पहुँच का लाभ उठाने के लिए प्रतिस्पर्धा करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सभी भारतीयों के लिए व्यापक समृद्धि सुनिश्चित करने हेतु सतत और समावेशी विकास आवश्यक है।
भारत की व्यापार नीति के संदर्भ में उन्होंने कहा कि देश के व्यापार समझौते केवल शुल्कों में कटौती, उत्पत्ति के नियम निर्धारित करने या बाजार तक पहुँच सुनिश्चित करने तक सीमित नहीं हैं। ये व्यापक साझेदारियाँ हैं, जिनमें भारत की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमताओं को ध्यान में रखा जाता है, निर्यात के अवसरों की पहचान की जाती है, संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा की जाती है तथा भारत के विकास के लिए आवश्यक उच्च-प्रौद्योगिकी उत्पादों, ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स (जीपीयू), मेमोरी प्रौद्योगिकी, चिकित्सा प्रौद्योगिकी और अन्य वस्तुओं तक पहुँच सुगम बनाई जाती है।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने कहा कि भारत की व्यापार वार्ताओं में सेवाएँ, निवेश, शिक्षा, कौशल विकास, प्रौद्योगिकी साझेदारी, जलवायु लक्ष्यों की दिशा में सहयोग तथा देशों की राष्ट्रीय स्तर खुद के निर्धारित योगदान की मंशा जैसे विषय भी शामिल हैं। उन्होंने कि
श्री गोयल ने कहा इन व्यापक व्यापार, आर्थिक एवं निवेश समझौतों के माध्यम से भारत के वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ एकीकरण की नींव रखी जा रही है। साथ ही, किसी भी समझौते को अंतिम रूप देने से पहले विभिन्न हितधारकों के साथ व्यापक परामर्श किया जाता है, ताकि भारत के संवेदनशील हितों और संरक्षण संबंधी प्राथमिकताओं की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।

