भिण्ड: आजकल के अधिकांश बच्चे मां-बाप की सुनते नहीं हैं। मां-बाप जो कहते हैं वो उन्हें सुनाई तो पड़ता है,लेकिन वे मानते नहीं हैं। मां-बाप और गुरू की आज्ञा पालन में ही भलाई है। यह विचार संत रमेशभाई ओझा ने दंदरौआ धाम में श्रीमद्भागवत कथा के शुभारंभ अवसर पर व्यक्त किए।कथा से पूर्व धाम में भव्य कलश यात्रा निकाली गई, जिसमें पीताम्बरधारी माता-बहनों के साथ बटुक ब्राह्मण भी सिर पर कलश लेकर चले। कथा यजमान पूर्व मंत्री अनूप मिश्रा सिर पर पोथी लेकर नंगे पांव चले। यात्रा के दौरान संपूर्ण दंदरौआ धाम की परिक्रमा लगाई गई। उसके बाद वैदिक आचार्यों ने व्यास पीठ का पूजन कर कथा आरंभ कराई।
रमेश भाई ओझा ने बताया कि जब वे ग्वालियर के फूलबाग में कथा करने आए थे, तो उस दौरान दंदरौआ धाम में दर्शन के लिए भी आए थे। तभी धाम के महामंडलेश्वर रामदास महाराज ने दंदरौआ में भागवत कथा कराने का भाव व्यक्त किया था। समय की प्रतिकूलता की वजह से थोड़ी देरी हुई, लेकिन हनुमानजी की कृपा से एक बार फिर ग्वालियर अंचल में आपको सुनने और मुझे सुनाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। कथा का श्रवण बहुत ही भाग्य से मिलता है, इसलिए ऐसा अवसर को खोना नहीं चाहिए।
इस मौके पर महामंडलेश्वर रामदास महाराज, मंहत कालिदास तेजपुरा, महंत अवध बिहारी, मंत्री राकेश शुक्ला, पूर्व मंत्री एवं कथा यजमान अनूप मिश्रा, भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष लाल सिंह आर्य, समाजसेवी रामशंकर शर्मा, कौशल तिवारी, नरेंद्र शर्मा, रामबरन पुजारी, जलज त्रिपाठी, पवन शास्त्री, नरसी दद्दा, गौरव तोमर, प्रमोद चौधरी सहित सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे।
