
उज्जैन। बिरसा मुंडा की 150 वी जयंती शनिवार को राष्ट्रीय जनजाति गौरव दिवस के रूप में मनाई जा रही है। प्रदेश सरकार ने इस बार जनजाति गौरव दिवस पर प्रदेश की जेल से आजीवन कारावास की सजा काट रहे बंदियों को समय से पहले रिहाई का निर्णय लिया है। केंद्रीय जेल भेरूगढ़ से सुबह 2 कैदियों को रिहा किया गया। केंद्रीय जेल भैरवगढ़ अधीक्षक मनोज कुमार साहू ने बताया कि राज्यपाल मंगू भाई पटेल के निर्णय पर प्रदेश सरकार द्वारा राष्ट्रीय जनजाति गौरव दिवस भगवान बिरसा मुंडा की 150 वीं जयंती पर प्रदेश की जेल में बंद बंदियों को रिहा करने के आदेश 7 नवंबर को जारी किए थे। इसके बाद केंद्रीय जेल भैरवगढ़ से राष्ट्रीय जनजाति गौरव दिवस का दो बंदियों को रिहा किया गया है। रिहाई पाने वालों में इम्तियाज पिता शेर अली निवासी महिदपुर और गोपाल पिता श्याम सिंह बंजारा मंदसौर हैं। दोनों को आजीवन कारावास की सजा हुई थी। लेकिन अच्छे आचरण और जेल नियमों का पालन करने पर उन्हें समय से पहले रिहा किया गया है। जेल अधीक्षक के अनुसार उज्जैन केंद्रीय जेल के साथ ही प्रदेश की जेल में बंद 32 आजीवन कारावास के कैदियों को रिहा किया जा रहा है। अब तक वर्ष में चार बार आजीवन कारावास की सजा पाए कैदियों को छोडऩे का प्रावधान था लेकिन मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य बना है। जहां राष्ट्रीय जनजाति गौरव दिवस पर भी बंदियों की रिहाई की जाएगी। अब तक गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस, अंबेडकर जयंती और गांधी जयंती पर बंदियों की रिहाई की जाती थी। राज्यपाल के इस निर्णय से समाज में यह संदेश दिया गया कि राष्ट्रीय जनजाति गौरव दिवस केवल जनजाति समुदाय तक सीमित नहीं है बल्कि हर वर्ग का दिन है।
