छ: समितियों में 281 फर्जी पंजीयन

सिंगरौली। खरीफ सीजन वर्ष 2026-27 में समितियों के द्वारा व्यापक पैमाने पर फसल पंजीयन किये जाने का सनसनी खेज मामला सामने आया है। करीब आधा दर्जन समितियों के द्वारा 280 से अधिक फर्जी पंजीयन किया गया है। उप वन मंडलाधिकारी बैढ़न ने जिला आपूर्ति अधिकारी को पत्र लिखकर विभाग में सनसनी मचा दिया है। सत्यापन में मौके पर धान की फसले खेतो में नही मिली है।

दरअसल जिले में रबी एवं खरीफ फसलों के पंजीयन के दौरान समर्थन मूल्य पर क्रय फसलो के लिए समितियों के द्वारा व्यापक पैमाने पर लम्बे अर्से से फर्जी पंजीयन कर सरकार को लाखों-करोड़ो रूपये का चूना लगाया जा रहा है। ऐसा ही उप वन मंडलाधिकारी बैढ़न का एक पत्र सामने आया है,जिसमें उन्होंने जिला आपूर्ति अधिकारी सिंगरौली को पत्र लिखकर ऐसे समितियों के कर्ताधर्ताओं के विरूद्ध कार्रवाई किये जाने का आग्रह किया है। जिला आपूर्ति अधिकारी को लिखे गये पत्र में अवगत कराया है कि खरीफ सीजन वर्ष 2026-27 में वनाधिकार पट्टाधारियों द्वारा समर्थन मूल्य पर विक्रय कराए गये फसल पंजीयन का सत्यापन वन विभाग द्वारा कराया जा रहा है। सत्यापन के दौरान यह संज्ञान में आया है कि प्राथमिक सहकारी विपणन एवं प्रक्रिया सहकारी समिति माड़ा, समिति दफ्तर बसौड़ा में 102, प्राथमिक सहकारी विपणन एवं प्रक्रिया सहकारी समिति बैढ़न में 48, तियरा में 23, समिति सीधीखुर्द में 9 एवं सहकारी समिति परसौना कार्यालय गड़हरा में 8 की संख्या में फर्जी पंजीयन किया गया है। उप वन मंडलाधिकारी के पत्र में इस बात का भी जिक्र है कि उक्त फर्जी पंजीयन के सत्यापन में अधोहस्ताक्षरकर्ता के साथ-साथ मैदानी अमले का काफी लम्बे समय एवं शासकीय संसाधनों का दुरूपयोग हुआ है। ऐसे में वास्तविक प्राप्त वनाधिकारी पट्टेधारी कृषको के प्राप्त होने वाले लाभ पर अतिक्रमण है। एसडीओ फॉरेस्ट ने जिला आपूर्ति अधिकारी से पत्र के माध्यम से आगे कहा है कि उक्त विपणन समितियों में फर्जी पंजीयनकर्ताओं पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करें, ताकि भविष्य में इनके क्रियाकलापो पर प्रभावी तरीके से रोक लागई जा सके। वहीं खाद्य अधिकारी ने उपायुक्त सहकारिता सिंगरौली को पत्र लिखते हुये उप वनमंडलाधिकारी के पत्र का हवाला देकर समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन के लिए समितियों के द्वारा फर्जी पंजीयन के मामले में समिति के फर्जी पंजीयनकर्ताओं के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के लिए कहा है। फिलहाल उप वनमंडलाधिकारी के उक्त पत्र से सहकारिता एवं खाद्य विभाग में हड़कंप मचा है।

लम्बे अर्से से चल रहा फर्जी पंजीयन का खेल

वन विभाग ने खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में आधा दर्जन समितियों के फर्जीवाड़े का सत्यापन के दौरान पोल खोल दिया है। चर्चा है कि उक्त समितियों के द्वारा कई वर्षो से फर्जी पंजीयन कर लाखों करोड़ों का चूना सरकार को लगाते आ रहे हैं और अपने जेब भी गर्म करते आ रहे हैं, यदि पिछले कुछ वर्षो के पंजीयन की जांच हो जाए तो, एक नही अन्य कई कथित समितियों के कर्ताधर्ता लपेटे में आ सकते हैं। सवाल उठाया जा रहा है कि इतने वर्षो तक समर्थन मूल्य पर खरीदे जाने वाले फसलों के सत्यापन में लापरवाही क्यों बरती जा रही थी और अब क्या ऐसे समितियों के विरूद्ध सहकारिता विभाग कार्रवाई करेगा, या फिर एसडीओ फॉरेस्ट के पत्र को ठंडेबस्ते में डाल दिया जाएगा। हालांकि चर्चा है कि सहकारिता विभाग उक्त मामले को काफी गंभीरता से लिया है और बड़ा एक्शन लेने की तैयारी में है।

इनका कहना:-

वन विभाग से पत्र प्राप्त हुआ है। 90 प्रतिशत पंजीयन को असत्यापित कर दिया गया है। 10 प्रतिशत पंजीयन के संबंध में डीएसओ के माध्यम से भोपाल में पत्राचार किया गया है। यहां आधा दर्जन समितियों में खरीदी नही होगी, समितियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा जाएगा, इसके बाद आगे की कार्रवाई होगी।

पीके मिश्रा

उपायुक्त,सहकारिता विभाग,सिंगरौली।

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