
नीमच। काली पट्टी बांधकर विरोध, कलेक्टर कार्यालय पर सात दिन का धरना और ज्ञापन—इसके बावजूद मांगों का निराकरण नहीं होने पर कोटवारों ने अब भोपाल कूच का निर्णय लिया है। मध्यप्रदेश आजाद कोटवार कर्मचारी संघ के नेतृत्व में कोटवार 30 अक्टूबर को राजधानी रवाना होंगे और 31 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन धरना देकर सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाएंगे।
संघ के अनुसार, प्रदेश के करीब 38 हजार कोटवार अपनी लंबित मांगों को लेकर 2 से 22 अक्टूबर तक काली पट्टी बांधकर कार्य करते रहे। इसके बाद 22 से 28 अक्टूबर तक नीमच कलेक्टर कार्यालय परिसर में धरना दिया गया। बुधवार को अंतिम चरण के धरने के बाद भी समाधान नहीं होने पर आंदोलन राजधानी में ले जाने का फैसला किया गया।
नियमित नौकरी और सेवा भूमि का अधिकार प्रमुख मांग
कोटवारों की प्रमुख मांग प्रदेश के सभी कोटवारों को नियमित शासकीय कर्मचारी घोषित करने और दस वर्ष की सेवा पूरी कर चुके पात्र कर्मचारियों को योग्यता के आधार पर समकक्ष पदों पर पदोन्नति देने की है। इसके साथ ही पीढिय़ों से कोटवार परिवारों के उपयोग में रही सेवा भूमि पर मालिकाना हक बहाल करने, मानदेय में प्रतिवर्ष 500 रुपये की वृद्धि तथा वर्दी की राशि सीधे बैंक खातों में देने की मांग उठाई गई है।
संघ ने कोटवार पद समाप्त करने संबंधी आदेश निरस्त करने, मृत कोटवार के पात्र परिजन को नियुक्ति में प्राथमिकता देने और सेवाकाल में मृत्यु पर अनुग्रह सहायता बढ़ाने की मांग भी की है।
संघ पदाधिकारियों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में राजस्व और प्रशासनिक कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले कोटवार लंबे समय से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। अब भोपाल में अनिश्चितकालीन धरने के जरिए सरकार से मांगों पर ठोस निर्णय की अपेक्षा की जा रही है।
