
नरसिंहपुर। बरसात के दिनों में गांवों की स्थिति काफी गंभीर हो जाती है। कीचड़ युक्त दुर्गम मार्गों से आना जाना लोगों की मजबूरी बनीं हुई है। लेकिन गांव के बाहर बनें शवदाह गृह तक शवों को लेकर जाना गंभीर बना हुआ है।ऐसा ही एक उदाहरण तेंदूखेड़ा क्षेत्र के चांवरपाठा जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाले ग्राम सूखा ढिंगसरा गांव में एक युवक की अंतिम यात्रा दलदल भरे रास्ते से अंतिम संस्कार हेतु यात्रा में शामिल ले जाने में लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। हमारे प्रतिनिधि को मिली जानकारी के अनुसार रविवार को गांव के ही एक प्रतिष्ठित युवक नीरज पटेल का निधन हो गया। परिजन और ग्रामीणों को गांव से करीब आधा किलोमीटर दूर स्थित मुक्तिधाम तक शव ले जाना पड़ा। लेकिन इस रास्ते में कीचड़ और पानी के अलावा कुछ नहीं था। ग्रामीण कांधे पर अर्थी उठाए हुए हर कदम पर फिसलन से जूझते रहे। डर यह था कि कहीं पैर फिसल न जाए और अर्थी गिर न पड़े। यह नजारा गांव की बदहाल व्यवस्था और शासन-प्रशासन की अनदेखी को उजागर कर रहा था। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार हालात ऐसे हो जाते हैं कि शवयात्रा को मुक्तिधाम तक ले जाना नामुमकिन हो जाता है और मजबूरी में सड़क किनारे ही अंतिम संस्कार करना पड़ता है। कई बार तो आसपास के खेत मालिकों से जगह मांगनी पड़ती है। यह समस्या हर साल सामने आती है, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हुआ है।
गांव के लोगों ने बताया कि यही रास्ता कैबिनेट मंत्री उदय प्रताप सिंह के गांव की ओर जाता है और उनके खेत-खलिहान भी इसी मार्ग पर पड़ते हैं। गर्मी या सूखे मौसम में यह रास्ता उपयोगी रहता है। लेकिन बारिश आते ही दलदल बन जाता है। और शवयात्रा भी कठिन हो जाती है। इस संबंध में चांवरपाठा जनपद अध्यक्ष सोबरन सिंह ठाकुर ने घटना पर खेद जताया है। उन्होंने कहा कि मैंने स्वयं देखा कि सूखा ढिंगसरा गांव में अंत्येष्टि को ले जाने वालों को कितनी परेशानी उठानी पड़ती है। बड़े-बड़े दावे करने वाली भाजपा सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए। मैं जिले के वरिष्ठ अधिकारियों से बात करूंगा और जहां-जहां मुक्तिधाम तक जाने वाले रास्ते कमजोर हैं। उनके दुरुस्तीकरण की मांग करूंगा।
