साल 2030 तक हरित ऊर्जा के लिए 220 अरब डॉलर की आवश्यकता, भारत आरई सम्मेलन से निवेश बढ़ने की उम्मीद

नयी दिल्ली, 28 अक्टूबर (वार्ता) देश में हरित ऊर्जा को और बढ़ावा देने के लिए अगले चार साल में इस क्षेत्र में 220 अरब डॉलर के निवेश की आवश्यकता है और अगले सप्ताह आयोजित हो रहे भारत नवीकरणीय ऊर्जा (भारत आरई) सम्मेलन एवं प्रदर्शनी 2026 से गति और बढ़ने की उम्मीद है। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव संतोष कुमार सारंगी ने यहां बुधवार में सम्मेलन के बारे में मीडिया को जानकारी देने के क्रम में बताया कि साल 2024 में आयोजित भारत आरई सम्मेलन के बाद दो साल में सरकार ने जहां हरित ऊर्जा क्षेत्र के लिए छह अरब डॉलर का निवेश किया, जिससे प्रोत्साहित होकर 64 अरब डॉलर का निजी निवेश आया। इसमें 6.2 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश भी शामिल है। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन से भी इसी तरह की उम्मीद है कि यह निवेश को प्रोत्साहित करने का काम करेगा।

श्री सारंगी ने कहा कि 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा का लक्ष्य हासिल करने के लिए साल 2030 तक देश के हरित ऊर्जा क्षेत्र में 220 अरब डॉलर के निवेश की आवश्यकता है। इसमें सीधे हरित ऊर्जा और उसके लिए जरूरी पारितंत्र के विकास पर होने वाला निवेश भी शामिल है। सौर ऊर्जा पर 70 अरब डॉलर, पवन ऊर्जा पर 30-35 अरब डॉलर, ग्रीन हाइड्रोजन पर 20-25 अरब डॉलर, जैव ऊर्जा पर तीन से पांच अरब डॉलर और जल विद्युत पर 12-15 अरब डॉलर के निवेश की जरूरत है। इसके अलावा, बैटरी स्टोरेज पर 20 अरब डॉलर, विनिर्माण पर 15 अरब डॉलर और पारेषण पर 40-45 अरब डॉलर के निवेश की जरूरत होगी।

उन्होंने कहा कि यहां भारत मंडपम में 02-05 नवंबर तक आयोजित होने वाले सम्मेलन में हरित ऊर्जा से जुड़े सभी मुद्दों पर चर्चा होगी। इसमें 130 से अधिक देशों के 75,000 हजार से अधिक प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। इसमें 14 राज्यों और 70 देशों के विशेष सत्रों का आयोजन होगा। विदेशों से 40 मंत्रियों सहित 835 राजनयिकों ने अब तक अपनी उपस्थिति की पुष्टि की है। सम्मेलन और प्रदर्शनी का आयोजन 32 हजार वर्ग फुट में किया जा रहा है, जिसमें 400 एग्जिबिटर और 500 वक्ता होंगे।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दो नवंबर को भारत आरई का उद्घाटन करेंगे। उसी दिन बंद कमरे में सीईओ राउंड टेबल का आयोजन भी होगा। अगले दिन तीन नवंबर से आम लोगों के लिए निःशुल्क प्रवेश की सुविधा होगी। उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन 05 नवंबर को समापन समारोह में मुख्य अतिथि होंगे।

श्री सारंगी ने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य यह दिखाना है कि भारत ने अब तक हरित ऊर्जा के क्षेत्र में कितना कुछ हासिल किया है और आगे की सोच क्या है। साथ ही यह दूसरे देशों से सीखने का भी मौका होगा। इसमें सरकारों के बीच, सरकार और उद्यमियों के बीच तथा उद्यमियों के बीच आपस में समझौते होने की उम्मीद है। इसमें कई अकादमिशियन, आईआईटी और स्टार्टअप भी शामिल होंगे। अभी देश में कुल स्थापित ऊर्जा क्षमता 550 गीगावाट से अधिक है। इसमें 308 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन है। भारत 50 प्रतिशत हरित ऊर्जा का लक्ष्य समय से पहले हासिल कर चुका है और स्वघोषित समय से पहले 500 गीगावाट हरित ऊर्जा का लक्ष्य भी हासिल कर लिया जायेगा। इस सम्मेलन का थीम ‘इनवेस्ट, इनोवेट, इंस्पायर’ रखा गया है।

श्री मोदी इस अवसर पर हरित ऊर्जा पर राज्यों की रैंकिंग भी जारी करेंगे। वह साल 1947 से अब तक सौर ऊर्जा की देश की यात्रा की गाथा भी जारी करेंगे।
सम्मेलन को दौरान नवीकरणीय ऊर्जा पर राष्ट्रीय प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता, भारत आरई हैकाथन और स्कूली बच्चों के बीच आयोजित नवाचार प्रतियोगिता के विजेताओं को भी सम्मानित किया जायेगा।

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