चार साल की बच्ची की जुबां से निकली पीड़ा ने खोली मदरसे की हकीकत, 26 बच्चे रेस्क्यू

सुनील गोयल की विशेष रिपोर्ट
ग्वालियर: एक चार साल की बच्ची की आंखों में आंसू थे और जुबां पर उस पीड़ा का बयान, जिसे सुनने के लिए शायद उसे पहली बार कोई मिला था। बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष के सामने बच्ची ने अपने साथ हुए कथित अमानवीय व्यवहार की बात कही। यह सिर्फ एक बच्ची की व्यथा नहीं, बल्कि एजी ऑफिस रोड स्थित ‘दारुल उल कुरान’ मदरसे में रह रहे बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा और देखरेख की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला बन गया। जिला प्रशासन, मध्य प्रदेश राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में मदरसे को सील कर 26 बच्चों को रेस्क्यू किया गया। जांच में संचालन से जुड़े वैध दस्तावेज नहीं मिलने, नियमित स्कूली शिक्षा के रिकॉर्ड के अभाव और सुरक्षा इंतजामों में कमियों की बात सामने आई है। अब सवाल सिर्फ एक मदरसे पर हुई कार्रवाई का नहीं, बल्कि यह पता लगाने का भी है कि बच्चों को आवासीय शिक्षा देने वाली ऐसी संस्थाओं की निगरानी किस तरह हो रही है।
अध्यक्ष डॉ निवेदिता शर्मा- वैध दस्तावेज उपलब्ध नहीं
नवभारत प्रतिनिधि से मामले की जांच कर रही मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ निवेदिता शर्मा ने बताया कि मदरसा प्रबंधन के पास संचालन से संबंधित वैध दस्तावेज उपलब्ध नहीं थे। उन्होंने बताया कि हरिशंकरपुरम स्थित अंजुमन इस्लाहे मुआशरा समिति को मध्य प्रदेश सोसाइटी रजिस्ट्रेशन अधिनियम 1973 के तहत 9 मार्च 2017 को पंजीकृत किया गया था। इसके वर्तमान शासी निकाय (2023-2026) के अध्यक्ष श्री मुहम्मद असुद्दीन और सचिव श्री मुहम्मद इसहाक हैं। उन्होंने बताया कि समिति के कागज देखने से पता चला कि 25 जुलाई 2026 को रजिस्ट्रेशन की अवधि समाप्त हो गई थी। आयोग की जांच में पाया गया कि सभी पदाधिकारी ने अपने रहने का स्थान मदरसे में मस्जिद का पता लिखा है। (डॉ.) शर्मा ने बताया कि रिपोर्ट में सामने आने वाले तथ्यों और बच्चों के सर्वोत्तम हित को ध्यान में रखते हुए उनके पुनर्वास एवं संरक्षण के संबंध में नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
आयोग और प्रशासन ने बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा और इमारत के कानूनी स्वामित्व को लेकर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।

प्रमुख आंकड़े
रेस्क्यू किए गए कुल बच्चे: 26 (18 बालक और 8 बालिकाएं)
मदरसे में कुल 42 बालको और 16 बालिकाओं के फॉर्म मिले थे।
जिले में कुल पंजीकृत मदरसे: 16 (आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार)

पीड़ित बच्चों के मूल क्षेत्र: ग्वालियर, भिंड, दतिया, मुरैना एवं आसपास के जिले के अलावा उत्तर प्रदेश महाराष्ट्र राजस्थान और बिहार के भी बच्चों की जानकारी मिली है।

प्रदेश स्तर पर स्थिति: मध्य प्रदेश में 1,000+ पंजीकृत मदरसे संचालित

जांच में सामने आए मुख्य तथ्य
बिना मान्यता व पंजीयन संचालन- दारुल उल कुरान’ मदरसा मध्य प्रदेश मदरसा बोर्ड या जिला प्रशासन की अधिकृत सूची में पंजीकृत नहीं था। जानकारी के अनुसार स्कूली शिक्षा विभाग में भी उक्त मदरसे का कोई पंजीयन नहीं था। निरीक्षण के समय प्रबंधन कोई वैध एनओसी या शिक्षा विभाग में पंजीकरण प्रमाणपत्र प्रस्तुत नहीं कर सका।

शारीरिक प्रताड़ना व दुर्व्यवहार के आरोप- बाल अधिकार संरक्षण आयोग और बाल कल्याण समिति के समक्ष रेस्क्यू किए गए बच्चों ने मारपीट और अमानवीय व्यवहार की शिकायत दर्ज कराई। 4 वर्षीय बालिका ने बताया कि उसने पहली बार किसी से बात की है। उसने रोते हुए आयोग की अध्यक्ष को अपनी व्यथा बयां करते हुए कहा कि उसके साथ अत्यंत मानवीय व्यवहार किया जाता था।

स्कूली शिक्षा का अभाव- मदरसे में रह रहे बच्चों का किसी भी मान्यता प्राप्त स्कूल में नियमित दाखिला या स्कूली शिक्षा से संबंधित रिकॉर्ड नहीं मिला, जो शिक्षा के अधिकार मानकों के विपरीत है।

सुरक्षा नियमों का उल्लंघन- आवासीय परिसर में सीसीटीवी कैमरे, बालक और बालिकाओं के रहने तथा सुरक्षा के लिए तय मानकों का पालन नहीं पाया गया।

भूमि स्वामित्व का विवाद- एजी ऑफिस के जिस परिसर में मदरसा संचालित हो रहा था, इसका स्वामित्व संदिग्ध है। उसके भूमि स्वामित्व, सरकारी भूमि नजूल या वक्फ तथा निर्माण की अनुमति को लेकर राजस्व विभाग अलग से जांच कर रहा है।

राहुल पाठक, सहायक संचालक, महिला एवं बाल विकास विभाग के अनुसार, संबंधित मदरसे के विरुद्ध की गई कार्रवाई चाइल्ड वेलफेयर कमेटी द्वारा की गई है, जो एक स्वतंत्र संस्था के रूप में कार्य करती है। वर्तमान में सीडब्ल्यूसी की रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है। रिपोर्ट मिलने के बाद उसके निष्कर्षों के आधार पर बच्चों के संरक्षण एवं पुनर्वास के संबंध में नियमानुसार आगामी कार्रवाई की जाएगी।

अनुदान बंद होते ही थमी मदरसों की बाढ़, बच्चों की सुरक्षा पर निगरानी जरूरी: नियाज मोहम्मद
मध्य प्रदेश राज्य अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष नियाज मोहम्मद ने कहा कि मदरसा बोर्ड का उद्देश्य परंपरागत शिक्षा के साथ आधुनिक तालीम देना है। पहले एक शिक्षक वाले मदरसे को 3,000 और दो शिक्षकों वाले मदरसे को 6,000 रुपये अनुदान मिलता था। इससे मदरसों की संख्या बढ़ी, लेकिन अनुदान बंद होने के बाद विस्तार थम गया। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा में लापरवाही मिलने पर मदरसों की जांच और निगरानी जरूरी है।

नवभारत प्रतिनिधि ने शहर में संचालित मदरसों के संबंध में जानकारी जुटाई।
मुरार शहर क्र.2 विकासखण्ड के अंतर्गत मेवाती मोहल्ला, ग्वालियर में मदरसा जीनतुल इस्लाम और मदरसा जुबेदा फिरदोसी संचालित हैं। इसके अलावा, इसी विकासखण्ड में मदरसा इस्लाह जगनापुरा, ग्वालियर में, मदरसा फैज ए आम जगना पुरा नं. 2, ग्वालियर में, और मदरसा सायरा बेगम उर्दू हिंदी ग्वालियर में स्थित हैं।
मुरार शहर क्र.1 विकासखण्ड के अंतर्गत कई मदरसे आते हैं, जिनमें खासगी बाजार, ग्वालियर में मदरसा मिस्बाहुल उलूम इदगाह, ग्वालियर में कम्पू मदरसा, अवाड़पुरा, ग्वालियर में मदरसा मुस्तफा रजा ए, मदरसा दीनी तालीम और मदरसा रिजवानुल उलूम स्थित हैं। शेरोवाली माता के पास, गुडा, ग्वालियर में मदरसा सुल्तानिया संचालित है। गंजी मोहल्ला, ग्वालियर में मदरसा सईदा बेगम, बरकाती चौक, ग्वालियर में मदरसा तालीमुल ख्वातीन; और पंचायती इमाम बाड़े के सामने, इन्द्रा नगर, अवाड़पुरा, ग्वालियर में मदरसा तालिमुल इस्लाम स्थित है। इसके साथ ही, मुरार शहर क्र.1 विकासखण्ड के अंतर्गत मदरसा दारुल फलाह भी ग्वालियर में संचालित है।
वहीं भितरवार विकासखण्ड के अंतर्गत आंतरी, ग्वालियर में मदरसा बिस्मिल्लाह खानम दीनी तालीम एवं प्राइमरी संचालित है।

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