
ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन अनेक परिवारों की आजीविका का महत्वपूर्ण आधार है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित पशु सखियों की उपलब्धता से पशुपालकों को समय पर प्राथमिक सहायता और जरूरी सलाह मिल रही है। यह पहल महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित करने के साथ-साथ ग्रामीण परिवारों की आर्थिक सुरक्षा मजबूत करने में भी योगदान दे रही है।ग्रामीण विकास एवं सूचना एवं जन-सम्पर्क मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि जीविका दीदियां अपनी मेहनत, लगन और दृढ़ इच्छाशक्ति से न केवल अपने परिवारों को आर्थिक रूप से सशक्त बना रही हैं, बल्कि पूरे ग्रामीण समाज के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।उन्होंने कहा कि सरकार का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और गरीब से गरीब परिवार तक वित्तीय एवं तकनीकी सहायता पहुंचाना है। पशु सखी मॉडल के माध्यम से गांवों में पशुओं की प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल, टीकाकरण और जरूरी सलाह जैसी सेवाएं सहजता से उपलब्ध हो रही हैं। इससे पशुधन के संरक्षण में मदद मिल रही है और पशुपालकों की आय बढ़ाने की संभावनाएं मजबूत हो रही हैं।
श्री कुमार ने कहा कि जीविका के माध्यम से महिलाओं को प्रशिक्षण, आजीविका के अवसर और आत्मनिर्भर बनने का मंच उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्हें विश्वास है कि जीविका दीदियां इसी आत्मविश्वास और समर्पण के साथ आगे बढ़ती रहेंगी तथा ग्रामीण विकास को गति देने और विकसित बिहार के सपने को साकार करने में अपनी अग्रणी भूमिका निभाएंगी।
जीविका की यह पहल साबित कर रही है कि सही प्रशिक्षण, संस्थागत सहयोग और अवसर मिलने पर ग्रामीण महिलाएं पशुधन संरक्षण से लेकर परिवारों की आय बढ़ाने तक, विकास की प्रभावी भागीदार बन सकती हैं। गांवों की ये ‘डॉक्टर दीदियां’ महिला सशक्तीकरण और समृद्ध ग्रामीण बिहार की नई पहचान बन रही हैं।
