
रायपुर, 27 अक्टूबर (वार्ता) छत्तीसगढ़ के वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी ने मंगलवार को कहा कि राज्य का गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल अब केवल आवास निर्माण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सड़क, पुल, खेल परिसर, सार्वजनिक भवन और शहरी पुनर्विकास जैसी परियोजनाओं में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
आवास मंत्री चौधरी ने नवा रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ संवाद के सभागार में आयोजित मंडल की राज्य स्तरीय तकनीकी प्रशिक्षण कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में हाउसिंग बोर्ड को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और बहुआयामी अधोसंरचना विकास संस्था के रूप में विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ 2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए आधुनिक तकनीक, बेहतर वित्तीय प्रबंधन और नवाचार आधारित कार्यप्रणाली अपनाना आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने मंडल की लगभग 700 करोड़ रुपये की लंबित ऋण देनदारी समाप्त कर उसे वित्तीय दबाव से राहत प्रदान की है। इसके अतिरिक्त लंबे समय से रिक्त पड़ी आवासीय एवं व्यावसायिक संपत्तियों के विक्रय के लिए लागू वन टाइम सेटलमेंट (ओटीएस) योजना से राजस्व अर्जन में वृद्धि हुई है।
श्री चौधरी ने कहा कि भविष्य में आवासीय परियोजनाओं की शुरुआत वास्तविक मांग और बुकिंग के आधार पर की जाएगी। इसके लिए प्रारंभिक तीन महीनों में 30 प्रतिशत अथवा कुल 60 प्रतिशत बुकिंग की शर्त को निविदा प्रक्रिया से जोड़ा गया है। इसका उद्देश्य अनावश्यक वित्तीय जोखिम कम करना और परियोजनाओं में पूंजी फंसने की स्थिति से बचना है। उन्होंने कहा कि मंडल के पास उपलब्ध तकनीकी विशेषज्ञता और अनुभवी अभियंताओं की सेवाओं का उपयोग सड़क, पुल-पुलिया, स्टेडियम, खेल परिसर तथा अन्य सार्वजनिक निर्माण कार्यों में भी किया जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को अगले दो वर्षों में छत्तीसगढ़ के बाहर भी निर्माण परियोजनाएं हासिल करने का लक्ष्य निर्धारित करने के निर्देश दिए।
मंत्री चौधरी ने अधोसंरचना विकास में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी), टाउन प्लानिंग स्कीम (टीपीएस) और पुनर्विकास मॉडल के उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इन व्यवस्थाओं के माध्यम से सरकारी बजट पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव डाले बिना योजनाबद्ध शहरी विकास को गति दी जा सकती है। सेरीखेड़ी की टाउन प्लानिंग परियोजना का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि लगभग 800 करोड़ रुपये की अनुमानित अधोसंरचना विकास लागत वाली इस परियोजना में प्रतिस्पर्धात्मक निविदा प्रक्रिया के माध्यम से भूमि की आवश्यकता 218 एकड़ से घटकर लगभग 124 एकड़ रह गई। इससे करीब 94 एकड़ भूमि की बचत संभव हुई है, जिसका उपयोग अन्य सार्वजनिक आवश्यकताओं के लिए किया जा सकेगा।
उन्होंने कहा कि शहरों में महत्वपूर्ण स्थानों पर स्थित शासकीय भूमि के पुनर्विकास से आधुनिक कलेक्ट्रेट भवन, सरकारी कार्यालय, पुस्तकालय, उद्यान और खेल सुविधाओं का निर्माण किया जा सकता है। इसके लिए भूमि के एक हिस्से का व्यावसायिक उपयोग कर संसाधन जुटाने की संभावनाओं पर काम करना होगा।
कार्यशाला में मंडल के अध्यक्ष अनुराग सिंह देव ने बताया कि पिछले लगभग 18 महीनों के दौरान मंडल ने करीब आठ हजार संपत्तियों का विक्रय कर 1,800 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया है। इसके साथ ही दो हजार करोड़ रुपये से अधिक की नई परियोजनाओं को आगे बढ़ाया गया है। आगामी दिसंबर में भी नई परियोजनाएं शुरू करने की तैयारी की जा रही है। श्री सिंह देव ने कहा कि गृह निर्माण मंडल का अधोसंरचना विकास संस्था के रूप में विस्तार केवल नाम और अधिनियम में बदलाव नहीं है, बल्कि इसकी जिम्मेदारियों और कार्यसंस्कृति में भी व्यापक परिवर्तन की आवश्यकता है। मंडल का लक्ष्य प्रदेश के सभी 33 जिलों में आधुनिक सुविधाओं से युक्त व्यवस्थित आवासीय परिसर और टाउनशिप विकसित करना है। उन्होंने अधिकारियों से संपत्तियों के विक्रय, बकाया राशि की वसूली, परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन और निर्माण गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया।
कार्यशाला में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, आधुनिक निर्माण तकनीक, वित्तीय जोखिम प्रबंधन, टाउन प्लानिंग, ऑनलाइन आवास प्रबंधन, संपदा प्रबंधन, आरसीसी संरचनाओं की मजबूती और विपणन रणनीतियों सहित विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों ने मार्गदर्शन दिया।
इस अवसर पर आईआईएम रायपुर के निदेशक डॉ. संजीव पाराशर, आईआईआईटी नवा रायपुर के प्रोफेसर डॉ. श्रीनिवास केजी, एनआईटी रायपुर के प्रोफेसर डॉ. जीडी रामटेके, आवास एवं पर्यावरण सचिव अंकित आनंद, मंडल आयुक्त अवनीश शरण सहित वरिष्ठ अधिकारी, अभियंता और तकनीकी विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
