
सीधी, बहुप्रतीक्षित ललितपुर-सिंगरौली रेल परियोजना लाइन के रेलवे खंड चुरहट से रेल शुभारंभ में पूर्व सांसद एवं वर्तमान विधायक को आमंत्रण को लेकर सवाल खड़े हो रहे है। वहीं अब आमंत्रण और श्रेय को लेकर द्वंद मचा हुआ है।
जानकारों का कहना है कि जिस रेल परियोजना के लिये पूर्व सांसद एवं सीधी विधायक रीती पाठक ने अपने दो पंचवर्षीय कार्यकाल में संघर्ष किया, उनकी बदौलत वर्षों से रीवा-सिंगरौली रेलवे लाइन के बंद पड़े कार्य को बजट मिला और निर्माण कार्य में तेजी परिलक्षित हुई, परिणामस्वरूप 24 अक्टूबर को सीधी जिले के चुरहट रेलवे स्टेशन का उद्घाटन और मेमू ट्रेन का शुभारंभ हुआ। इस कार्यक्रम में रीती पाठक को आमंत्रित करना आवश्यक भी नहीं समझा गया।
मीडिया से चर्चा के दौरान भी पूर्व सांसद ने कहा कि मुझे आमंत्रण नहीं मिला। यदि सीधी विधानसभा क्षेत्र में रेलवे का उद्घाटन कार्यक्रम आयोजित होता और उन्हें आमंत्रण न मिलता तब भी वह खुशी-खुशी उसमें शामिल होतीं। दूसरे विधानसभा क्षेत्र में आयोजित उद्घाटन कार्यक्रम का आमंत्रण न मिलने से वह शामिल नहीं हो सकीं। फिर भी 10 साल सांसद रहते हुये उनके द्वारा जो काम किया गया है उसको जनता अच्छी तरह जानती है। अब आमंत्रण और ट्रेन आने के श्रेय को लेकर द्वंद मचा हुआ है।
कांग्रेसियों ने लगायें दाऊ साहब अमर रहे के नारे
रेलवे स्टेशन चुरहट में मेमू ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर शुभारंभ के बाद उसमें सवार होने वालों का तांता लग गया। काफी संख्या में कांग्रेसी भी मेमू ट्रेन के डिब्बे में सवार हुए और उनके द्वारा डिब्बे के मुख्य गेट और नीचे खड़े होकर दाऊ साहब अमर रहे के नारे लगाये गये। कांग्रेसियों द्वारा दाऊ साहब अमर रहे के नारे लगाने के पीछे मंशा यह रही कि पूर्व मुख्यमंत्री एवं केन्द्रीय मंत्री रहने के दौरान कुंवर अर्जुन सिंह ने ललितपुर-सिंगरौली रेल परियोजना की स्वीकृति एवं बजट आवंटन में योगदान दिया गया था।
सीधी विधायक के कार्यक्रम में शामिल नही होने पर उठे सवाल!
सीधी विधायक श्रीमती रीती पाठक के ललितपुर-सिंगरौली रेल परियोजना लाइन के रेलवे खंड चुरहट से रेल शुभारंभ कार्यक्रम में शामिल नहीं होने पर सवाल उठ रहे हैं। कुछ लोगों का मानना है कि अपने दो पंचवर्षीय संसदीय कार्यकाल के दौरान रीती पाठक ने उक्त रेल परियोजना को अपनी विशेष प्राथमिकता में रखा था। उनके सतत प्रयासों के चलते ही रेल परियोजना को लगातार बजट मिला, भू-अर्जुन का कार्य तेजी से हुआ, मुआवजा वितरण के साथ ही रेलवे में नौकरी का लाभ भी काफी लोगों को मिला।
