सिंगाजी मेले में आस्था शर्मसार: करोड़ों के मेले में पीली पन्नी के शौचालय 

खंडवा मूँदी/बीड़ (सिंगाजी धाम)। एक तरफ पुलिस अधीक्षक अगम जैन स्वयं मेला क्षेत्र का निरीक्षण कर सुरक्षा, यातायात और पार्किंग के लिए पसीना बहा रहे हैं, ताकि लाखों श्रद्धालुओं को सुरक्षित माहौल मिल सके। वहीं दूसरी तरफ मेले के असली आयोजक जनपद पंचायत हरसूद, जिला पंचायत की स्वच्छता शाखा और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने आस्था के इस महाकुंभ को अव्यवस्थाओं के हवाले कर दिया है।

जमीनी हकीकत – कागजों में लाखों, जमीन पर पन्नी

नवभारत की टीम को मौके पर जो तस्वीर मिली, वह शर्मनाक है। 20 से 29 अक्टूबर तक चलने वाले 10 दिवसीय मेले में जहां रोजाना हजारों श्रद्धालु, महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग आ रहे हैं, वहां शौचालय के नाम पर खुले मैदान में पीली प्लास्टिक की पन्नी लपेटकर तीन-चार डंडों के सहारे खड़े किए गए ढांचे हैं। अंदर पानी की व्यवस्था, न सफाई कर्मी, न महिला-पुरुष के लिए अलग व्यवस्था, न ही गेट। हवा चलती है तो पूरी पन्नी उड़ जाती है। यही है करोड़ों की आस्था वाले मेले की स्वच्छता व्यवस्था?़

महिला श्रद्धालुओं ने कहा – इससे अच्छा शौचालय न होता

मेले में आई महिला श्रद्धालुओं ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि इस व्यवस्था में शौचालय जाना उनकी निजता और सुरक्षा के लिए खतरा है। रात के समय तो हालत और भी खराब हो जाती है। कई श्रद्धालु खुले में जाने को मजबूर हैं, जिससे पूरे मेला परिसर में गंदगी और बदबू फैल रही है।

अब जांच कौन करेगा?़

संत सिंगाजी महाराज का यह मेला निमाड़ की आत्मा है। यहां सुरक्षा तो पुलिस दे देगी, लेकिन सम्मान और स्वच्छता कौन देगाड़ कलेक्टर ऋषव गुप्ता और जिला पंचायत सीईओ को इस मामले का स्वत: संज्ञान लेकर जनपद पंचायत के मेला खर्च का ऑडिट कराना चाहिए।

सवाल सीधा है – जब एसपी सुरक्षा के लिए मैदान में हैं, तो सुविधाओं के जिम्मेदार अधिकारी कार्यालयों में क्यों बैठे हैं? यदि इस व्यवस्था की समीक्षा और दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो हर साल आस्था के नाम पर यही पीली पन्नी का खेल चलता रहेगा।

तीन विभाग, तीनों फेल

1. आयोजक जनपद पंचायत हरसूद-

हर साल मेला लगाने का पूरा बजट और टेंडर इसी के पास है। सवाल यह है कि हर साल मेला लगने के बाद भी स्थायी शौचालय कॉम्प्लेक्स क्यों नहीं बनाया गयाड़ अस्थायी शौचालयों के नाम पर किस ठेकेदार को भुगतान हुआ और कितना हुआ?

2. जिला पंचायत और स्वच्छता मिशन-

स्वच्छ भारत मिशन के लाखों रुपये कहां गए?़ क्या ओडीएफ प्लस के दावे सिर्फ फाइलों में हैंड़ मेले में मोबाइल टॉयलेट वैन तक की व्यवस्था नहीं।

3. पीएचई और मेला प्रबंधन समिति-

पेयजल के साथ-साथ इन शौचालयों में पानी की व्यवस्था इनकी जिम्मेदारी थी, लेकिन मौके पर एक भी नल चालू नहीं।

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