
सिंगरौली । जिला कांग्रेस कमेटी सिंगरौली ग्रामीण की राजनीति में इन दिनों पर्दे के पीछे सियासी गतिविधियां तेज होने की चर्चाएं हैं। वर्तमान जिलाध्यक्ष एवं पूर्व विधायक सरस्वती सिंह की संगठनात्मक पकड़ को कमजोर करने की कोशिशों की अटकलों के बीच नेतृत्व परिवर्तन की सुगबुगाहट भी तेज हो गई है। पार्टी के अंदर सक्रिय कुछ नेता कथित तौर पर नए नेतृत्व के पक्ष में माहौल बनाने में जुटे हैं।
आदिवासी नेता एवं सक्रिय कांग्रेस पदाधिकारी अशोक सिंह पैगाम का नाम संभावित विकल्प के रूप में चर्चा में आने से जिले की कांग्रेस राजनीति में नए समीकरणों की अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि इन चर्चाओं पर प्रदेश नेतृत्व की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। कांग्रेस की जिला इकाई में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा को केवल संगठनात्मक फेरबदल के रूप में नहीं देखा जा रहा है। राजनीतिक हलकों में इसे पार्टी के भीतर चल रही खींचतान और प्रभाव बढ़ाने की कोशिशों से जोड़कर देखा जा रहा है। चर्चा है कि कुछ नेता पर्दे के पीछे अपनी रणनीति के तहत नए नेतृत्व के लिए जमीन तैयार करने में सक्रिय हैं। ऐसे में सवाल यह है कि यह कवायद संगठन को मजबूत करने के उद्देश्य से हो रही है या इसके पीछे स्थानीय राजनीतिक समीकरण साधने की कोशिश है।
गुटबाजी के बीच कमजोर पड़ता संगठन
सिंगरौली ग्रामीण कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती आपसी तालमेल और कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने की है। संगठन में गुटबाजी की चर्चाएं नई नहीं हैं। शहरी क्षेत्रों से लेकर ग्रामीण अंचलों तक पार्टी की सक्रियता बढ़ाने और कार्यकर्ताओं को एक मंच पर लाने की जरूरत महसूस की जा रही है। राजनीतिक जानकारों की मानें तो आंतरिक खींचतान का असर संगठन की गतिविधियों पर पड़ता है और इसका लाभ विरोधी दलों को मिल सकता है।
