इंदौर: शहर में जलसंकट की समस्या इस साल बारिश कम होने के कारण बताई जा रही है, लेकिन वास्तविकता में बढ़ते शहर की अनदेखी का परिणाम है वर्तमान जलसंकट. शहर में अमृत 1.0 योजना लागू हुई, तब बढ़ते शहर और नई बसाहट की तरफ ध्यान नहीं दिया गया. आज स्थिति यह है कि इंदौर 278 स्कवेयर वर्ग किलोमीटर में है और नर्मदा का पानी 147 वर्ग किलोमीटर के एरिया में ही सप्लाई हो रहा है.मतलब साफ है कि शहर का 131 स्म्ेयर वर्ग किलोमीटर क्षेत्र, जो 30′ से ज्यादा है, में नर्मदा का पानी नहीं पहुंच पाया है. शहर का 131 स्म्ेयर वर्ग किलोमीटर क्षेत्र बोरिंग और टैंकरों के भरोसे है. शहर के पुराने 147 स्म्ेयर वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में भी पानी 15 दिन ही दिया जाता है, यानि एक दिन छोड़कर कर, मगर जलकर पूरे महीने का. इस सबसे बढ़कर सवाल यह है कि जब पानी ही नहीं है तो टैंकर भरोगे कहां से?
इंदौर शहर में इस साल बारिश कम होने से जलसंकट को लेकर चर्चा आम है. इंदौर नर्मदा के भरोसे है, यह भी किसी से छुपा नहीं है. शहर में जमीनी जलस्तर 8 सौ फीट से ज्यादा नीचे चला गया है, यह राष्ट्रीय भू-जल सर्वेक्षण की रिपोर्ट में उल्लेखित है. इसके बावजूद अधिकारियों ने बढ़ते शहर और पानी की बढ़ती मांग को लेकर ठोस कदम नहीं उठाया. वर्तमान स्थिति में पुराने शहर में एक दिन छोड़कर नर्मदा का पानी दिया जाता है. यह कई व्यवस्था कई सालों से है. दूसरी ओर शहर में तालाब, कुएं-बावड़ियों या अन्य जल स्त्रोत को खत्म होने से बचाने के प्रयास नहीं किए गए. आज की स्थिति में शहर के 8 में से 6 तालाब में 25′ पानी है और दो तालाब में एक बूंद पानी नहीं आया है.
टंकियां बनी लेकिन सप्लाय शुरू नहीं हुआ
शहर में अमृत 1.0 योजना में नए इलाकों में 30 टंकियां बनाने का काम शुरू किया और कुछ टंकियां बन गई है, लेकिन उसने सप्लाई लाइन का काम नहीं हुआ. खास बात यह है कि कई इलाकों में नर्मदा टंकियों से सीधे जल वितरण है. यह लाइन नहीं होने के अभाव में व्यवस्था है. 2009 में अमृत योजना 1.0 लागू हुई और शहर में मास्टर के तहत नगर निगम सीमा में 29 गांव जोड़ दिए गए, यह निगम सीमा में जोड़ने का प्रस्ताव पहले से ही नगर निगम और प्रशासन को पता था, लेकिन पानी को लेकर दूरदर्शिता नहीं रखी गई. बढ़ते शहर में नर्मदा तीसरे चरण को लाया गया , लेकिन शहर में तीसरे चरण से भी पानी की आपूर्ति नहीं हो रही है. शहर की जनसंख्या के मान अभी 131 स्म्ेयर वर्ग किलोमीटर में पानी नहीं है. इतने बड़े इलाके में जनता सिर्फ बोरिंग एवं टैंकरों के भरोसे है.
हाइड्रेंट सूखे, पानी कहां से भरेंगे
सवाल यह है कि नगर निगम गर्मी के अनुसार कम बारिश के चलते 7 सौ से बढ़ाकर 8 सौ टैंकर चलाने की बात कर रहा है. ऐसे जब शहर के 50 हज़ार से ज्यादा बोरिंग में पानी कम है या नहीं है. निगम के 50 से ज्यादा हाइड्रेंट में से आधे हाइड्रेंट सूखे है. नगर निगम 800 सौ टैंकर भरेगा कहां से? यदि शहर की 70 से ज्यादा नर्मदा पानी टंकियों से टैंकर भरे, तो फिर शहर में भी जलसंकट संभव है.
दूरदर्शी सोच नहीं रखी
कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि आज इंदौर में बढ़ते शहर को देखते हुए समय पर नगर निगम, प्रशासन और नर्मदा विभाग ने नर्मदा लाइन का विस्तार, टंकियों का निर्माण और जल वितरण व्यवस्था के लिए दूरदर्शी सोच नहीं रखी, आज कम बारिश के कारण जलसंकट है, लेकिन भू -स्तर को बनाए रखने की योजना नहीं बनाई गई.
350 एमएलडी पानी और दावा 430 एमएलडी का
शहर में नर्मदा के तीनों चरणों से कुल मिलाकर 350 एमएलडी पानी मिल रहा है. निगम द्वारा 430 एमएलडी का दावा किया जा रहा है. शहर में एक अनुमान के अनुसार निजी, सरकारी और अन्य संस्थानों के मिलाकर 1 से ज्यादा बोरिंग होना बताया जा रहा है. इसमें से 50 प्रतिशत यानि 50 हजार से ज्यादा बोरिंग रिचार्ज हो नहीं हुए है. बचे 50 हजार बोरिंग, जो चालू है, वह भी पूरी क्षमता से पानी नहीं दे रहे हैं. इसके अलावा शहर में अधिकाशं कुएं बावड़ी कई सालों पहले ही दम तोड़ चुके है. कुछ में ड्रेनेज का पानी मिक्स होकर आ रहा है. कुछ में सीमेंट कांक्रीट की सड़कों से जल स्तर नीचे जाने से सूख गए है.
अभी 3 सौ टैंकरों से निगम बांट रहा पानी
नगर निगम द्वारा वर्तमान स्थिति में अभी से 300 निजी और 50 निगम के टैंकरों से पानी वितरित कर रहा है. निगम ने पिछली गर्मी में अच्छी बारिश के बावजूद 7 सौ निजी टैंकर से पानी सप्लाई किया गया था. अभी भी निगम द्वारा गर्मी में लगे तीन सौ निजी टैंकर चलाए जा रहे हैं. मतलब यह है कि निगम इस साल टैंकर बंद नहीं कर पाया है.
गंदे पानी की समस्या यथावत
नगर निगम शहर के कई इलाकों में नर्मदा का साफ पानी अभी नहीं दे पा रहा है. शहर के मध्य से लेकर कॉलोनियों, मोहल्लों और बस्तियों में गंदा पानी सप्लाई की शिकायत बनी हुई है. पिछले सप्ताह एक पार्षद निगम जनसुनवाई में बोतल भरकर गंदा पानी लेकर आयुक्त को शिकायत करने पहुंचा था. इसके अलावा भागीरथपुरा में जहरीले पानी से 36 मौते हुई थी. शहर अधिकाशं क्षेत्रों में नर्मदा का पानी गंदा आने की समस्या यथावत बनी हुई है. नगर निगम द्वारा शहर में 70 से ज्यादा जगहों पर नर्मदा लाइन में ड्रेनेज लाइन का गंदा पानी मिक्स होने के स्थान चिन्हित किए थे. उनमें से आधी स्थानों पर आज भी नर्मदा में ड्रेनेज का पानी मिक्स हो रहा है और गंदे पानी की समस्या बरकरार है.
क्या कहते हैं जिम्मेदार
जलसंकट को लेकर नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल से सवाल जवाब
– शहर में कितने प्रतिशत क्षेत्र में नर्मदा पानी की लाइन नहीं है ?
शहर में करीब 18 प्रतिशत रहवासी क्षेत्र में नर्मदा नहीं है।
– जलसंकट को लेकर कैसे निपटेंगे ?
शहर में निजी, सरकारी बोरिंग ओर टैंकरों से पानी वितरण करेंगे.
– लाइन लीकेज और मोटर लगाकर पानी खींचने पर रोक कैसे लगेगी?
नागा निगम में जलापूर्ति के लिए योजना बनाई जा रही है. मोटर जब्त करने और जुर्माना लगाए जाने की तैयारी रहेगी.
– तालाब ख़ाली पड़े हैं, भू-जल स्तर काफी नीचे चलेगा है और बोरिंग भी रिचार्ज नहीं हुए हैं. पानी की पूर्ति कैसे होगी?
शहर के यशवंत सागर और बिलावली तालाब को नर्मदा लाइन से भरने के अलावा जिन क्षेत्रों में पानी की कमी होगी टैंकर से पानी देने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है. जल संरक्षण को लेकर शहर में जन जागरूकता अभियान शुरू कर जनता से पानी बचाने का आग्रह और प्रयास करेंगे.
