नई दिल्ली, तेजी से बदलते वैश्विक और रणनीतिक माहौल के बीच भारत के रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह 12 से 15 अक्टूबर 2026 तक साइप्रस और ग्रीस के चार दिवसीय महत्वपूर्ण दौरे पर रवाना हो गए हैं। रक्षा मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, अपनी यात्रा के पहले चरण (12 से 13 अक्टूबर) में रक्षा सचिव साइप्रस के रक्षा मंत्रालय में अपने समकक्षों और शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात करेंगे। मई 2026 में साइप्रस के राष्ट्रपति के भारत दौरे के बाद दोनों देशों के बीच संबंधों को ‘रणनीतिक साझेदारी’ में बदला गया था। इस दौरे से पूर्वी भूमध्य सागर और हिंद महासागर को जोड़ने वाले समुद्री कॉरिडोर में सुरक्षा, नौसैनिक समन्वय और द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को एक नई गति मिलने की उम्मीद है।
ग्रीस के सैन्य और रक्षा नेतृत्व से होगी उच्चस्तरीय वार्ता, आईएमईसी (IMEC) कॉरिडोर और रक्षा-औद्योगिक साझेदारी पर रहेगा जोर
दौरे के दूसरे चरण में रक्षा सचिव ग्रीस के शीर्ष रक्षा और सैन्य नेतृत्व से वार्ता करेंगे, जो फरवरी 2026 में ग्रीक रक्षा मंत्री की भारत यात्रा के दौरान हुई द्विपक्षीय प्रगति की समीक्षा होगी। यूरोपीय संघ (EU) और नाटो (NATO) के सदस्य ग्रीस के साथ भारत वर्ष 2026 की संयुक्त सैन्य सहयोग योजना, रक्षा-आधुनिकीकरण और औद्योगिक साझेदारी को मजबूत करने पर काम कर रहा है। सामरिक विशेषज्ञों का मानना है कि इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC) और इजराइल-ग्रीक बंदरगाहों के जुड़ाव के दृष्टिकोण से ग्रीस भारत के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है, जो यूरोपीय बाजार में भारत की आर्थिक और सुरक्षा स्थिति को सुदृढ़ करता है।
लाल सागर और भूमध्य सागर में सुरक्षा चिंताओं के बीच अहम पहल, जनवरी 2026 के भारत-यूरोपीय संघ सुरक्षा समझौते को मिलेगा व्यवहारिक रूप
यह उच्चस्तरीय दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब पश्चिम एशिया में तनाव, लाल सागर संकट और रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय शिपिंग मार्गों और ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं पर असर पड़ा है। जनवरी 2026 में हुए ऐतिहासिक ‘भारत-यूरोपीय संघ सुरक्षा और रक्षा साझेदारी’ समझौते के बाद साइप्रस और ग्रीस के साथ यह जुड़ाव यूरोपीय संस्थानों के साथ भारत के व्यापक संबंधों को और व्यावहारिक आधार प्रदान करेगा। स्वेज नहर और बाब-अल-मंदेब के रास्ते होने वाले भारतीय व्यापार की सुरक्षा सुनिश्चित करने, साइबर सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी अभियानों में सहयोग बढ़ाने के लिए भूमध्य सागर में भारत का यह नया कूटनीतिक प्रयास अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

