
भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को 27 प्रतिशत आरक्षण दिलाने के मामले में प्रभावी पैरवी नहीं करने और पुराने आंकड़ों पर निर्भर रहने का आरोप लगाया है। कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि ओबीसी वर्ग को आरक्षण का लाभ दिलाने के लिए कानूनी और लोकतांत्रिक स्तर पर संघर्ष जारी रहेगा।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने संयुक्त प्रेसवार्ता में सरकार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए आरक्षण के मामले में अब तक उठाए गए कदमों का जवाब मांगा।
उमंग सिंघार ने उच्च न्यायालय के 159 पृष्ठों के आदेश का हवाला देते हुए पुराने आंकड़ों की प्रासंगिकता, व्यापक सर्वेक्षण की आवश्यकता और आरक्षण के समर्थन में ठोस प्रमाण प्रस्तुत करने के मुद्दे उठाए। उन्होंने सवाल किया कि प्रदेश की लगभग 7.26 करोड़ आबादी की सामाजिक स्थिति का आकलन महज 10 हजार लोगों के सर्वेक्षण के आधार पर किस हद तक किया जा सकता है।
कांग्रेस के पूर्व प्रवक्ता आनंद जाट ने प्रोजेक्टर के माध्यम से वर्ष 1983 से 2026 तक ओबीसी आरक्षण से जुड़े घटनाक्रम की जानकारी दी। उन्होंने महाजन आयोग की रिपोर्ट, सर्वेक्षण की व्यापकता और आरक्षण की 50 प्रतिशत सीमा से जुड़े कानूनी पहलुओं पर सवाल उठाए।
जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि सरकार ने कानूनी प्रक्रिया पर भारी खर्च किया, लेकिन अपेक्षित परिणाम हासिल नहीं हुए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण के लिए सुप्रीम कोर्ट में कानूनी लड़ाई लड़ने और अपने वकीलों का खर्च उठाने के लिए तैयार है। उन्होंने वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और विवेक तन्खा की भूमिका को लेकर भी प्रयास करने की बात कही।
पटवारी ने बताया कि आगे की रणनीति तय करने के लिए बैठक आयोजित की जाएगी और जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2028 में मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने पर 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण लागू कराने के लिए पार्टी प्रतिबद्ध रहेगी। कांग्रेस ने सरकार से प्रभावी कानूनी पैरवी और आरक्षण लागू करने की स्पष्ट कार्ययोजना सार्वजनिक करने की मांग की।
