
जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने रायसेन जिले में वन क्षेत्र से सटे इलाके में कथित अवैध खनन गतिविधियों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। चीफ जस्टिस अल्पेश वाई कोगजे तथा जस्टिस विवेक जैन की युगलपीठ ने आवेदकों को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह में जवाब पेश करने के आदेश जारी किये।
याचिकाकर्ता सौरभ पटेल व अंकित पटेल की तरफ से दायर की गयी याचिका में कहा गया था कि अनावेदक कल्याण सिंह अहिरवार के द्वारा रायसेन जिले में वन क्षेत्र से सटे इलाके में अवैध खनन की गतिविधियों जारी है। याचिका के साथ 29 जून 2026 की एक रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। यह रिपोर्ट रायसेन के फ्लाइंग स्क्वॉड प्रभारी एवं कार्यवाहक उप वन क्षेत्रपाल के हस्ताक्षर से जारी हुई थी। रिपोर्ट में निजी प्रतिवादी द्वारा वन क्षेत्र के समीप खनन गतिविधियां होने की बात सामने आई है।
याचिका की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की तरफ से याचिका की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि याचिकाकर्ता जनहित याचिका की आड़ में निजी हित साधने का प्रयास कर रहे हैं। राज्य की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि याचिकाकर्ताओं के पिता स्वयं खनन गतिविधियों से जुड़े हित रखते हैं।
एकलपीठ ने अपने आदेष में कहा है कि वन भूमि में हो रही कथित अवैध खनन गतिविधियां चिंता विषय है। वन क्षेत्र में इस प्रकार खनन गतिविधियां संचालित हो रही हैं, तो यह गंभीर मामला है और संबंधित खनन पट्टे की शर्तों का उल्लंघन हो सकता है।
एकलपीठ ने खनन विभाग व वन विभाग को रिपोर्ट के आधार पर खनन गतिविधियों पर रोक पर लगाने के निर्देश जारी करते हुए अगली सुनवाई के दौरान विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश जारी किये है। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता आशीष रावत ने पैरवी की।
